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उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर में भ्रष्टाचार, घटिया कानून और तारीख पर तारीख की नीति के खिलाफ लोगों का धैर्य अब टूट रहा है। शिल्पकार/कुम्हार आरक्षण और एडीवी (ADV) इन्वेंशन एकेडमी की लड़ाई को लेकर वर्तमान व्यवस्था पर दोहरा अत्याचार करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस अन्यायपूर्ण व्यवस्था के खिलाफ पुलिस रिफॉर्म, एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म और ज्यूडिशियल रिफॉर्म को नितांत आवश्यक बताते हुए बड़े बदलाव की मांग उठाई गई है।
इस मामले में प्रशासन पर सीधे तौर पर तीन मोर्चों पर प्रहार किया गया है। आरोप है कि 31 दिसंबर 2016 के उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश, फरवरी 2025 के डीएम (DM) आदेश और मई 2025 के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (भारत सरकार) के अनुसूचित जाति सूची संशोधन प्रकोष्ठ के आदेश के बावजूद राज्य स्तरीय अपील में जानबूझकर 7 महीने की देरी की गई है। इसके अलावा, एडीवी इन्वेंशन एकेडमी पर अवैध कार्रवाई कर शिक्षा के अधिकार पर हमला किया गया है और पीएमओ पीजी (PMO PG) व जनसुनवाई पोर्टल पर फर्जी रिपोर्ट लगाकर शिकायतों का केवल कागजी निस्तारण किया जा रहा है।
इस तानाशाही के आगे न झुकने का संकल्प लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर छूटे हुए दोषियों को पार्टी बनाया गया है। अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान ने यह दृढ़ संकल्प लिया है कि जब तक उत्तराखंड की तर्ज पर 17 जातियों को उनका संवैधानिक हक नहीं मिल जाता और एडीवी एकेडमी निर्बाध रूप से नहीं चलने लगती, तब तक वे चैन से नहीं बैठेंगे। कार्यकर्ताओं ने अपना हक लेकर रहने और सिस्टम को सुधारने का खुला ऐलान किया है।
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