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संत कबीर नगर के कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य जनपद में आयुष्मान योजना से जुड़े निजी चिकित्सालयों की गुणवत्ता, क्रियाशीलता और उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं का मूल्यांकन करना था। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी और मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रामानुज कनौजिया भी उपस्थित रहे।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जनपद के 25 निजी चिकित्सालयों की जांच हेतु विशेष टीमें गठित की गई थीं। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने निरीक्षण में पाई गई कमियों की गहन समीक्षा की और आठ चिकित्सालयों को मानकों को पूरा न करने के कारण डी-इम्पैनल्ड करने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी निजी चिकित्सालयों का संचालन निर्धारित मानकों के अनुरूप होना अनिवार्य है, अन्यथा नियमानुसार सख्त कार्यवाही की जाएगी।
समीक्षा के दौरान चिकित्सा सुरक्षा को लेकर भी कड़े दिशा-निर्देश दिए गए। सभी चिकित्सालयों में ओटी संचालन के लिए डी-फैब्रीलेटर और फायर सेफ्टी की अनिवार्यता तय की गई है, साथ ही भवन में कम से कम दो निकासी द्वार होना आवश्यक है। जिन अस्पतालों में ओटी तो चल रही है लेकिन डी-फैब्रीलेटर नहीं है, उन्हें दो सप्ताह के भीतर इसे उपलब्ध कराने का समय दिया गया है। इसके अतिरिक्त, जिलाधिकारी ने आयुष्मान भारत योजना के तहत किए गए केसों और उनके भुगतान की स्थिति का तत्काल विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए हैं।
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