उदा जरीवाला की गिरफ्तारी पर पूर्वांचल गाँधी की प्रतिक्रिया: उडा जरीवाला को जेल भेजना लोकतंत्र पर प्रहार है।
गोरखपुर: शाहपुर थाना क्षेत्र से उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को संबोधित एक पत्र जारी कर पत्रकार उदा जरीवाला को जेल भेजे जाने पर कड़ा विरोध पूर्वांचल गांधी ने जताया है।
पत्र में सवाल उठाया गया है कि उदा जरीवाला ने ऐसा क्या कह दिया कि उन्हें जेल भेज दिया गया? क्या उनकी टिप्पणी इतनी गंभीर थी कि उनके खिलाफ जेल भेजने जैसी कार्रवाई की जरूरत पड़ी?
यदि ऐसी टिप्पणियों पर जेल भेजने की कार्रवाई होगी तो समाज में समान रूप से सभी मामलों में कानून लागू होना चाहिए। गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर के अपमान के कई मामले सामने आते रहे हैं। लेखक ने दावा किया कि उन्होंने स्वयं आंबेडकर की प्रतिमा के साथ कथित रूप से जूते से मारपीट और चेहरे पर कालिख पोतने की घटना देखी है।
गांधी ने सवाल किया है कि सहारनपुर पुलिस ने उदा जरीवाला को जेल क्यों भेजा? यदि कानून का उल्लंघन हुआ है तो कार्रवाई सभी के खिलाफ समान रूप से होनी चाहिए। पत्र में 1911 में निर्मित बताई गई एक मस्जिद को तोड़े जाने और Places of Worship (Special Provisions) Act, 1991 के कथित उल्लंघन का भी मुद्दा उठाया गया है।
उदा जरीवाला ने मस्जिद टूटने की घटना पर अपनी नाराजगी व्यक्त की थी और यह प्रतिक्रिया कथित तौर पर एक पत्रकार के सवाल के जवाब में दी गई थी। इसी आधार पर उनकी गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं।
इन्होंने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक से मांग की है कि उदा जरीवाला को तत्काल रिहा किया जाए और पूरे मामले में निष्पक्षता बरती जाए।
साथ ही मामले की प्रतिलिपि सर्वोच्च न्यायालय, राज्यपाल, इलाहाबाद हाईकोर्ट, मानवाधिकार आयोग, लोकायुक्त उत्तर प्रदेश, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश तथा प्रमुख सचिव/गृह सचिव को भेजे जाने का उल्लेख किया गया है।
पत्र में उठाया गया मूल सवाल यही है—क्या पत्रकार की टिप्पणी पर जेल भेजना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा में आता है या यह कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों पर चोट है? अब इस मामले में पुलिस और प्रशासन के आधिकारिक पक्ष का इंतजार है।
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