आरक्षण का विरोध करने वाले बड़े लेवल के चालबाज हैं जिनको जवाब देने की जरूरत है।
दबे, कुचले, शोषित, पीड़ित समुदाय से जुड़े जातियों को आरक्षण के जरिए संविधान में यह कोशिश की गई थी कि उन्हें विकास की मुख्य धारा से जोड़ दिया जाएगा। किंतु समय बीतने के साथ आज इस आरक्षण रूपी टूल को शोषक लोग फिर से नष्ट करने की कोशिश में लगे हुए हैं। यह बात अंबेडकर जन मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रवण कुमार निराला ने कही है।
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