शुरू न्यूज़
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में क्षेत्र पंचायत निधि से कराए गए विकास कार्यों में भारी वित्तीय अनियमितताओं और घोटाले के खिलाफ लोकायुक्त ने सख्त रुख अपनाया है। पत्रकार फूलचंद चौधरी की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए लोकायुक्त ने इस पूरे मामले की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। यह पहला मौका है जब मनरेगा या ग्राम निधि के दायरे से हटकर सीधे ‘क्षेत्र पंचायत निधि’ के विकास कार्यों में लोकायुक्त स्तर से जांच के निर्देश दिए गए हैं। इस कड़े कदम से सदर ब्लॉक प्रमुख राकेश कुमार श्रीवास्तव और बीडीओ त्रिवमणि की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
यह मामला पिछले पाँच महीनों से लंबित था, जिसे लगभग 262 पन्नों के बिल वाउचर और पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाया गया है। गहन छानबीन के बाद लोकायुक्त ने जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) को तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच टीम गठित करने का निर्देश दिया है। इस विशेष टीम में एक प्रशासनिक अधिकारी, एक पुलिस अधिकारी और एक अभियोजन अधिकारी को शामिल किया गया है।
लोकायुक्त को दी गई शिकायत के अनुसार, क्षेत्र पंचायत निधि के राज्य वित्त और 15वें वित्त आयोग से प्राप्त धन का जमकर दुरुपयोग किया गया है। घोटाले के तहत आरसीसी, सीसी सड़क, पुलिया, इंटरलॉकिंग, खड़ंजा और ह्यूम पाइप निर्माण कार्यों की स्वीकृति एवं भुगतान में भारी फर्जीवाड़ा किया गया। इसके अलावा, नगर पालिका द्वारा पूर्व में कराए गए कार्यों को अपना बताकर लाखों रुपये का गबन किया गया, जिसके समर्थन में 262 बिल वाउचर प्रस्तुत किए गए हैं। साथ ही, सदर क्षेत्र में लगाए गए वाटर कूलर, विकास खंड कार्यालय एवं सभागार की मरम्मत व साज-सज्जा और सहकारी समिति भवनों के जीर्णोद्धार पर खर्च की गई धनराशि में भी बड़ा खेल किया गया है।
वित्तीय भुगतानों पर क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष और बीडीओ के हस्ताक्षर होते हैं, इसलिए सदर ब्लॉक प्रमुख राकेश कुमार श्रीवास्तव और बीडीओ त्रिवमणि को इसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार माना जा रहा है। चूंकि आरटीआई के तहत पर्याप्त दस्तावेज पहले ही सार्वजनिक हो चुके हैं, इसलिए मामले में लीपापोती करना संभव नहीं होगा। यदि स्थानीय जांच टीम द्वारा क्लीन चिट दी भी जाती है, तो लोकायुक्त की सीधी निगरानी में पुनः जांच कराई जा सकती है। शिकायतकर्ता के अपनी शिकायत पर अडिग रहने के कारण दोषियों पर कड़ी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।
अपना राज्य चुनें
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
बिहार
छत्तीसगढ़
दिल्ली
हरियाणा
हिमाचल प्रदेश
जम्मू और कश्मीर
झारखंड
मध्य प्रदेश
राजस्थान
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड