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उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में सरयू-घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान 92.730 मीटर से 15 से 56 सेमी ऊपर बह रहा है और दो दर्जन से अधिक गांव तबाही के मुहाने पर हैं। ऐसे संकट के समय बाढ़ विभाग के अधिकारियों पर आपदा को अवसर बनाकर तटबंधों की सुरक्षा और पिचिंग के नाम पर करोड़ों रुपये के बजट के दुरुपयोग और व्यापक भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं।
विभाग के काले कारनामों के तहत बाढ़ खंड प्रथम के अधिशासी अभियंता कार्यालय में वेतन मद में ₹1,25,41,987 का गोलमाल उजागर हो चुका है और मुकदमे दर्ज हो रहे हैं। इसके अलावा बस्ती मंडल में कागजों पर ही ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ की मदद से तटबंधों को चमकाकर ₹1 करोड़ से अधिक का बजट डकारने का ‘एआई घोटाला’ भी सामने आया है। ग्रामीणों के अनुसार बाढ़ सुरक्षा के नाम पर संगठित ‘बोरी का खेल’ चल रहा है, जिसमें कागजों पर 10,000 बोरियां डालने का दावा कर मौके पर महज 2,000 से 3,000 बोरियां ही फेंकी जाती हैं। पानी में बह गई फटी बोरियों को दोबारा निकालकर रेत-मिट्टी भरकर नया एस्टीमेट बना दिया जाता है।
सोनौली-मोहम्मदपुर क्षेत्र में 6 स्परों के रेस्टोरेशन के काम का मंडलायुक्त द्वारा निरीक्षण किए जाने के बावजूद धरातल पर महज खानापूरी और फटी बोरियों का दिखावा चल रहा है। प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी 33,850 बोरियों और लाखों रुपये के बारदाना हेरफेर के मामले सामने आ चुके हैं। जब सरयू की मुख्य धारा टेढ़ी नदी से मिलकर बीडी बांध और पंप कैनाल के अस्तित्व को निगलने को आतुर है, तब प्रशासन का पूरा जोर सिर्फ बोरियों की खरीद-फरोख्त पर है। जनता मांग कर रही है कि इस खेल की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ा चाबुक चलाया जाए।
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