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बस्ती के बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय में तैनात बाबू विमल कुमार त्रिपाठी पर एक बेरोजगार युवक से नौकरी दिलाने के नाम पर 6 लाख रुपये ठगने का गंभीर आरोप लगा है। कोतवाली थाने में आरोपी बाबू के खिलाफ धोखाधड़ी और धमकी देने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले सरकारी दफ्तरों में दलालों और भ्रष्टाचार के इस बड़े खेल का खुलासा पीड़ित द्वारा पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र के बाद हुआ।
जिगिना निवासी पीड़ित विनोद कुमार शुक्ला के अनुसार, आरोपी बाबू ने खुद को शिक्षा विभाग में नौकरी लगवाने वाला बताकर कुल 18 लाख रुपये की मांग की थी, जिसमें 6 लाख रुपये एडवांस मांगे गए थे। पीड़ित ने कर्ज लेकर 18 नवंबर 2016 को दो गवाहों की मौजूदगी में बीएसए कार्यालय परिसर में ही 6 लाख रुपये नकद सौंप दिए थे। काम न होने और रकम वापस मांगने पर आरोपी टालमटोल करता रहा। दबाव बनाने पर दिया गया एचडीएफसी बैंक का चेक भी बाउंस हो गया, जिसके बाद आरोपी ने संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय में अपनी तैनाती का धौंस देते हुए पीड़ित को धमकियाँ दीं।
सीओ सिटी की जांच रिपोर्ट के बाद 23 जुलाई को यह मुकदमा दर्ज किया गया, जिसकी विवेचना उप निरीक्षक राम कुमार यादव को सौंपी गई है। यह मामला उस गहरे और भ्रष्ट तंत्र की ओर इशारा करता है जहाँ शिक्षा के मंदिरों में बेकसूर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है। यह उच्चस्तरीय जांच का विषय है कि क्या यह खेल अकेला बाबू खेल रहा था या इसके पीछे अन्य अधिकारियों और सफेदपोशों का भी संरक्षण शामिल है।
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