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बस्ती में यातायात निदेशालय, लखनऊ के आदेश और पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह के निर्देशन में नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। अपर पुलिस अधीक्षक श्यामकांत के पर्यवेक्षण और क्षेत्राधिकारी यातायात बृजेश सिंह के नेतृत्व में प्रभारी यातायात कुलदीप त्रिपाठी की टीम ने मुख्य टोल नाके पर मोर्चा संभाला है। इस दौरान तीन सवारी (ट्रिपल राइडिंग), ड्रिंक एंड ड्राइव और प्रेशर हॉर्न के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, पुलिस की इस मुस्तैदी के बावजूद बस्ती टोल प्लाजा और बड़ेवन पर धड़ल्ले से चल रहे अवैध टैक्सी व ऑटो स्टैंडों को लेकर प्रशासनिक चुप्पी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
यातायात पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, यातायात माह 2025 में जिले भर में 17,285 वाहनों का चालान कर 1 करोड़ 97 लाख 7 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसमें 12,470 मामले अकेले बिना हेलमेट के थे। इसके अलावा एक ही विशेष अभियान में 726 वाहनों का चालान कर 7.14 लाख रुपये वसूले गए, जबकि महादेवा, लालगंज, बनकटी और सोनूपार जैसे ग्रामीण चौराहों पर एक दिन में 226 वाहनों पर 2.32 लाख का जुर्माना लगाया गया। दूसरी ओर, आरटीओ से मात्र 5 सवारी की अनुमति होने के बावजूद रेलवे स्टेशन, रोडवेज, कचहरी, बड़ेवन, मुड़घाट और टोल प्लाजा पर ऑटो में 10 से 12 सवारियां बिठाई जा रही हैं। ₹20,000 तक के जुर्माने का नियम होने के बाद भी ओवरलोडिंग करने वाले इन ऑटो पर चालान की कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
बड़ेवन और टोल प्लाजा पर पटरियों पर अवैध कब्जों तथा बीच सड़क पर सवारियां उतारने-चढ़ाने से रोजाना शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक बड़ेवन से हरदिया तक भारी जाम लगता है। जिला अस्पताल के पास एंबुलेंस तक फंसी रहती हैं और हाल ही में हुई पीजीटी परीक्षा के दौरान भी आवागमन पूरी तरह प्रभावित रहा। जनता का सवाल है कि क्या पुलिस का चाबुक केवल आम बाइक सवारों से ₹1000 का चालान काटने के लिए है और ओवरलोड ऑटो स्टैंडों से होने वाली रोजाना की अवैध वसूली के कारण इन पर कार्रवाई नहीं हो रही है। बस्ती की जनता ने टोल पर महज चालान की खानापूर्ति की जगह इन नासूर बन चुके अवैध अड्डों को ध्वस्त कर स्थायी पार्किंग, ई-रिक्शा बे और सीसीटीवी मॉनिटरिंग की मांग की है।
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