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राजस्थान के डूंगरपुर जिले के धंबोला थाना क्षेत्र के लिखी बड़ी गांव में रविवार को वात्रक एनीकट पर एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे वागड़ क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। यहाँ गहरे पानी में डूबने से एक ही परिवार की दो बेटियों, उनके इकलौते भाई और उनकी मौसी की बेटी की मौत हो गई। इस मर्मांतक हादसे के बाद पूरे गांव में ऐसा मातम पसरा कि शोक के कारण किसी भी घर में चूल्हा तक नहीं जला। जब एक ही आंगन से तीन सगे भाई-बहनों की अर्थियां एक साथ उठीं, तो पूरा गांव फफक पड़ा और नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
खेती-बाड़ी कर परिवार पालने वाले बाबूसिंह डामोर और आंगनवाड़ी साथिन के रूप में कार्यरत उनकी पत्नी ने अपने बच्चों को बड़े लाड़-प्यार से पालकर उनके उज्ज्वल भविष्य के सपने संजोए थे। मृतकों में उनकी बड़ी बेटी हिना डामोर (24 वर्ष) शामिल है, जो इंग्लिश लिटरेचर में एमए कर एक निजी स्कूल में पढ़ाती थी। वहीं इकलौता बेटा प्रतीक डामोर (20 वर्ष), जिसने 12वीं में 88 प्रतिशत अंक लाकर हाल ही में बीएसटीसी प्रवेश परीक्षा में 340 अंक हासिल किए थे और शिक्षक बनने की तैयारी में था। सबसे छोटी बेटी ईशिता डामोर (15 वर्ष) कक्षा 11वीं की छात्रा थी। इन तीनों के साथ ही गुजरात के पालनपुर निवासी उनकी मौसी की बेटी रौनक परमार (20 वर्ष) की भी इस हादसे में मौत हो गई।
रविवार की छुट्टी के दिन ये सभी बच्चे अपने मामा शिवराम डामोर, मौसी के लड़के और मामा के लड़के के साथ वात्रक एनीकट पर नहाने गए थे। नहाने के दौरान अचानक प्रतीक का पैर गहरे पानी में फिसल गया, जिसे बचाने के प्रयास में उसकी दोनों बहनें हिना, ईशिता और मौसी की बेटी रौनक भी पानी में उतर गईं। देखते ही देखते चारों गहरे पानी में समा गए। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर दौड़े ग्रामीणों ने राजवीर (15) और जयसिंह (11) को तो सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन बाकी चारों को नहीं बचाया जा सका। उन्हें बाहर निकालकर सीमलवाड़ा अस्पताल लाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने मामला दर्ज कर मेडिकल बोर्ड से चारों शवों का पोस्टमार्टम कराया। इसके बाद तीनों सगे भाई-बहनों के शव परिजनों को सौंप दिए गए, जबकि रौनक के शव को उसके परिजन अंतिम संस्कार के लिए गुजरात रवाना ले गए। हादसे की खबर मिलते ही सीमलवाड़ा अस्पताल में भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिसमें तहसीलदार राजेश मीणा, पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा, भाजपा जिला महामंत्री ईश्वरलाल लबाना, जिला प्रवक्ता राजेश पाटीदार, धंबोला थानाधिकारी देवेंद्र देवल, एसआई अशोक कुमार, एएसआई धर्मेंद्र सिंह और समाजसेवी कांतिलाल डामोर सहित बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे। यह हृदयविदारक हादसा पूरे क्षेत्र के लिए एक ऐसी असहनीय टीस छोड़ गया है, जिसकी पीड़ा वर्षों तक महसूस की जाएगी।
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