मौसम में बदलाव से बढ़ी मरीजों की संख्या, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ठर्रापार में उमड़ रहे मरीज
गोरखपुर। पाली क्षेत्र में इन दिनों मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। कभी गर्मी तो कभी उमस और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर इसका असर पड़ रहा है। मौसम बदलने के साथ ही क्षेत्र में मौसमी बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ता नजर आ रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ठर्रापार में पिछले कुछ दिनों से बुखार, खांसी, जुकाम और अन्य मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
सुबह से ही अस्पताल की ओपीडी में इलाज कराने के लिए मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें बच्चों, बुजुर्गों के साथ-साथ बड़ी संख्या में अन्य लोग भी शामिल हैं। कई मरीज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, गले में खराश, खांसी और जुकाम जैसी शिकायत लेकर चिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं। मौसम में अचानक बदलाव के कारण लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ठर्रापार के चिकित्सक डॉ. शुभम कुमार ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण इन दिनों सीजनल बीमारियों के मरीज अस्पताल में पहुंच रहे हैं। बुखार, खांसी, जुकाम समेत अन्य मौसमी समस्याओं के मामले बढ़े हैं। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि मौसम के बदलाव को देखते हुए विशेष सावधानी बरतें और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न करें।
डॉ. शुभम कुमार ने लोगों से साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने, स्वच्छ पानी पीने और खानपान में सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार बुखार, खांसी या अन्य परेशानी बनी रहती है तो चिकित्सक से जांच और उचित परामर्श लेना चाहिए। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं का सेवन करने से बचना चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी लोगों को मौसम के अनुरूप सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। चिकित्सकों का कहना है कि बदलते मौसम में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है, इसलिए पर्याप्त आराम, संतुलित भोजन और साफ-सफाई पर ध्यान देना जरूरी है।
क्षेत्र में बढ़ रही मौसमी बीमारियों के बीच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ठर्रापार में आने वाले मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श और उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर समय रहते स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सक से परामर्श लें, ताकि बीमारी को गंभीर होने से पहले नियंत्रित किया जा सके।
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