गीडा में होटल-स्पा की आड़ में ‘काला कारोबार’ का आरोप! आखिर किसके संरक्षण में चल रहा खेल*
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गोरखपुर/गीडा। गीडा के पिपरौली चौकी क्षेत्र और खासकर सेक्टर-22 में संचालित कुछ होटल, रेस्टोरेंट और स्पा सेंटर एक बार फिर गंभीर आरोपों के चलते सवालों के घेरे में हैं। स्थानीय लोगों और सूत्रों के हवाले से यहां लंबे समय से होटल और स्पा सेंटरों की आड़ में कथित रूप से अनैतिक गतिविधियां संचालित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। सवाल अब सिर्फ कारोबार पर नहीं, बल्कि उन जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर भी उठ रहा है, जिनकी निगरानी में यह पूरा क्षेत्र आता है।
*नोटिस, कार्रवाई और फिर वही कहानी*
बताया जाता है कि पूर्व में गीडा प्राधिकरण के तत्कालीन एसीओ की ओर से करीब दो दर्जन से अधिक होटल संचालकों को नोटिस जारी किए गए थे। कुछ मामलों में कार्रवाई भी हुई। इसके बावजूद आरोप है कि कुछ होटल संचालक थोड़े समय बाद फिर से अपने प्रतिष्ठान संचालित करने में सफल रहे।
यही स्थिति सबसे बड़ा सवाल खड़ा करती है—अगर नियमों का उल्लंघन हुआ था तो कार्रवाई स्थायी क्यों नहीं हुई? और अगर सब कुछ नियमानुसार है तो बार-बार शिकायतें आखिर क्यों सामने आ रही हैं?सेक्टर-22 पर क्यों नहीं लग पा रहा ‘ब्रेक’?
ट्रांसपोर्ट नगर सेक्टर-22 में पिछले कुछ वर्षों के दौरान होटल और अन्य प्रतिष्ठानों से जुड़ी कई घटनाएं सामने आने का दावा किया जा रहा है। कुछ मामलों में पुलिस कार्रवाई और छापेमारी की बात भी सामने आई, जबकि कुछ होटल संचालकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज होने और जेल जाने की बातें भी कही जाती रही हैं।
लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई के कुछ दिनों बाद हालात फिर पुराने ढर्रे पर लौट आते हैं।
यानी सवाल यह नहीं कि कार्रवाई हुई या नहीं, सवाल यह है कि कार्रवाई का असर आखिर कितने दिन रहा?
*‘सर्विस’ के नाम पर हजारों रुपये वसूली का आरोप*
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ होटलों में कमरा लेने के बाद कथित रूप से अलग-अलग ‘सर्विस’ के नाम पर 2,000 से 5,000 रुपये तक अतिरिक्त रकम मांगी जाती है।हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। यदि ऐसी शिकायतें सही हैं तो यह केवल अनैतिक गतिविधियों का मामला नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं से कथित अवैध वसूली और संबंधित नियमों के उल्लंघन का भी गंभीर विषय बन सकता है।
*वायरल वीडियो और ‘सूत्रों’ के दावों ने बढ़ाए सवाल*
क्षेत्र में समय-समय पर वायरल वीडियो और स्थानीय सूत्रों के दावों के जरिए होटल व स्पा सेंटरों में कथित अनियमितताओं की बातें सामने आती रही हैं। कुछ सूत्र जिम्मेदारों तक कथित रूप से रकम पहुंचाए जाने के आरोप भी लगाते हैं।
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लेकिन यही वह बिंदु है जहां जांच की सबसे ज्यादा जरूरत है।यदि किसी होटल संचालक द्वारा किसी अधिकारी या कर्मचारी को अवैध रकम दिए जाने का दावा किया जा रहा है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं बिना ठोस प्रमाण किसी व्यक्ति या विभाग पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाना भी उचित नहीं होगा।
*एक निलंबित सिपाही का मामला भी बना नजीर*
होटल से जुड़े मामलों में कथित धनउगाही को लेकर एक पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई और बर्खास्तगी की घटना पहले सामने आ चुकी है। इसके बावजूद यदि उसी क्षेत्र में अवैध गतिविधियों की शिकायतें लगातार मिल रही हैं तो यह पुलिस व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
क्या एक कार्रवाई के बाद पूरा तंत्र सक्रिय हुआ था, या मामला कुछ दिनों की सुर्खियों के बाद फिर ठंडे बस्ते में चला गया?
*अंशिका सिंह समेत अन्य घटनाओं के तार गीडा से जोड़ने के दावे*
हाल में सामने आए अंशिका सिंह प्रकरण को लेकर भी गीडा क्षेत्र से कथित कनेक्शन की बातें कही जा रही हैं। इसी तरह गोरखनाथ थाना क्षेत्र की एक अन्य घटना के तार भी गीडा से जुड़े होने के दावे किए जा रहे हैं।इन मामलों में वास्तविक तथ्य क्या हैं, यह जांच का विषय है। लेकिन यदि अलग-अलग गंभीर घटनाओं में बार-बार एक ही क्षेत्र का नाम सामने आ रहा है तो पुलिस-प्रशासन के लिए यह महज संयोग मानकर आगे बढ़ जाने का विषय नहीं होना चाहिए।
आखिर खिलाड़ी कौन?
सबसे बड़ा सवाल यही है—
*क्या गीडा प्राधिकरण की निगरानी व्यवस्था कमजोर है*
क्या स्थानीय पुलिस को गतिविधियों की जानकारी नहीं? *क्या संबंधित विभागों के बीच समन्वय का अभाव है?*
या फिर कुछ प्रभावशाली लोगों की वजह से कार्रवाई के बाद भी अवैध कारोबार दोबारा खड़ा हो जाता है?
इन सवालों का जवाब जांच से ही सामने आ सकता है।
*‘एक्शन’ नहीं, अब चाहिए स्थायी समाधान*
जरूरत सिर्फ छापेमारी की नहीं है। यदि किसी होटल या स्पा सेंटर में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ लाइसेंस, अग्नि सुरक्षा, भवन मानचित्र, व्यापारिक अनुमति, होटल संचालन की वैधता और अन्य संबंधित दस्तावेजों की भी जांच होनी चाहिए।
साथ ही जिन प्रतिष्ठानों के खिलाफ बार-बार शिकायतें मिल रही हैं, उनकी गतिविधियों की निष्पक्ष निगरानी और नियमित सत्यापन जरूरी है।
क्योंकि सवाल किसी एक होटल, किसी एक अधिकारी या किसी एक विभाग का नहीं है—सवाल गीडा की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता का है।
*अब जिम्मेदारों से जनता का सीधा सवाल* अगर सब कुछ नियमों के मुताबिक चल रहा है तो शिकायतों और आरोपों की जांच सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं होती?अगर अवैध गतिविधियां हो रही हैं तो कार्रवाई के बाद वे दोबारा कैसे शुरू हो जाती हैं?
और अगर किसी स्तर पर संरक्षण या मिलीभगत के आरोप हैं तो उसकी जांच कौन करेगा?गीडा के सेक्टर-22 में उठते इन सवालों का जवाब अब सिर्फ पुलिस की कार्रवाई नहीं, बल्कि पारदर्शी और निष्पक्ष जांच दे सकती है।
*फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है*
गीडा में होटल-स्पा की आड़ में कथित काले कारोबार का खेल आखिर कब खत्म होगा और इसके पीछे छिपे असली चेहरे कब सामने आएंगे?”वहीं मुख्य कार्यपालक अधिकारी गीडा अनुज मलिक ने कहा कि मामले की जांच कराकर कार्यवाही किया जाएगा।
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