गंवई सियासत के पटल पर वर्चस्व की जिद ने छीन लिया कबीर की धरती से कुश्ती के नूर को
– कोतवाली खलीलाबाद के भक्ठान गांव के राजस्व गांव गोसाईपुर का है मामला
– कुश्ती कला के बेताज बादशाह ब्रह्मानंद यादव को खो कर रो पड़ी कबीर की सरजमीं
– चंद माह पूर्व एक शादी समारोह में हुई जुबानी जंग ने तैयार कर दी थी इस जघन्य हत्याकांड की पृष्ठभूमि
लोहरैया संत कबीर नगर
आज जिले का हर एक शख्स दुखी है, निः शब्द है, गुस्से में है, अवाक है! सवाल है आखिर क्यों? मिट्टी की कुश्ती में कबीर की सरजमीं के कोहिनूर का यूं जाना हर किसी के लिए अविश्वसनीय है। ऐसी नृशंस हत्या जिसने मानवता को भी शर्मशार कर दिया। मृतक ब्रह्मानंद अपने कौशल और संस्कारों की बदौलत विरोधियों के दिलों पर भी राज करता था। हंसमुख और संबंधों के प्रति समर्पित ब्रह्मानंद गंवई सियासत के चक्रव्यूह कुछ यूं फंसा कि उनकी मासूम औलाद पिता की छात्र छाया से महरूम हो गया। गांव से जुड़े सूत्रों की माने तो इस अप्रत्याशित और विध्वंसक घटना की बुनियाद कुछ माह पहले ही एक शादी समारोह में ही हो गई थी। बताया जाता है कि मृतक ब्रह्मानंद के बड़े भाई गांव के निर्वाचित प्रधान (वर्तमान में प्रशासक) हैं। हत्यारोपी परिवार के लोग भी इस बार प्रधानी की तैयारी में जुटे हुए थे। सूत्रों का दावा है कि कुछ माह पहले एक शादी समारोह में मौजूद मृतक ब्रह्मानंद के बड़े भाई को सुना कर हत्यारोपियों की तरफ से अशोभनीय फब्ती कस दी गई थी। अगले दिन उसी बात को लेकर दोनों पक्षों में विवाद होने की बात बताई जा रही है। है। अपने मृदुल स्वभाव और बेहतर संबंधों की बदौलत भाई की प्रधानी का ब्रह्मानंद ही केंद्र बिन्दु थे। ऐसे में गंवई सियासत में अपना रसूख स्थापित करने की चाहत में विरोधियों ने ब्रह्मानंद यादव को ही रास्ते से हटा कर अपना दबदबा स्थापित करने की योजना तैयार किया। सूत्रों की माने तो कुश्ती कला के बेताज बादशाह की काबिलियत से वाकिफ हत्यारों ने पहले उनकी आँख में मिर्च पाउडर डाल कर उन्हें देखने से विवश किया बाद में पैर में गोली मार कर चलने में भी विवश कर दिया। पूर्वांचल के चर्चित पहलवान को बेबस करके धारदार हथियार से अधमरा करके जिले के कोहिनूर को मौत की आगोश में सुलाने वालों को तो कानून सजा देगा ही लेकिन गंवई राजनीति के वर्चस्व के लिए जिले ने जहां कुश्ती कला के एक कोहिनूर को खो दिया वहीं आरोपी परिवार भी कानून के शिकंजे में फंस कर खुद के भविष्य को जमीजोद कर लिया। ब्रह्मानंद के अनाथ मासूम बच्चे की परवरिश के लिए जिले का एक देवदूत मौजूद है लेकिन हत्यारों की बर्बाद पीढ़ियों का रहबर कौन होगा? अंत में सिर्फ इतना कहना है कि सियासत को सियासत तक ही सीमित रखिए। इसके लिए खुद के साथ ही अपने विरोधियों को बर्बाद मत करिए।
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