**उत्तर प्रदेश में प्रजापति (कुम्हार) सहित 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति (SC) में शामिल करने के लिए राज्य सरकारों द्वारा समय-समय पर मुख्य रूप से 4 बार शासनादेश* (Government Orders/GO) और अधिसूचनाएं जारी की गई हैं।
*इन प्रमुख शासनादेशों (GO) का विवरण इस प्रकार है:
*1* . *वर्ष 2005 का शासनादेश (मुलायम सिंह यादव सरकार)*
विवरण: तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की सरकार ने पहली बार प्रजापति और अन्य पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति (SC) की श्रेणी में शामिल करने के लिए अधिसूचना और शासनादेश जारी किया था।
*2. *वर्ष 2016 के दो शासनादेश (अखिलेश यादव सरकार)*
दिनांक: 21 दिसंबर 2016 और 22 दिसंबर 2016विवरण: विधानसभा चुनाव से ठीक पहले समाजवादी पार्टी सरकार ने प्रजापति (कुम्हार) सहित 17 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की जातियों को अनुसूचित जाति (SC) में शामिल करने के लिए दो अलग-अलग शासनादेश जारी किए थे ।
3. *वर्ष 2016-17 का दुसरा शासनादेश*
दिनांक: 12 जनवरी 2017 (और इसके पहले 31 दिसंबर 2016 के संदर्भ में)विवरण: इस दौरान ‘शिल्पकार’ श्रेणी के अंतर्गत कुम्हार/प्रजापति समाज सहित 17 अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र जारी करने से जुड़े दिशा-निर्देश और शासनादेशों की व्याख्या जारी की गई थी।
4. *वर्ष 2019 का शासनादेश (योगी आदित्यनाथ सरकार* )
दिनांक: 24 जून 2019विवरण: उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक पुराने अंतरिम आदेश का संदर्भ लेते हुए सभी जिलाधिकारियों (DMs) और कमिश्नरों को आदेश जारी किया कि वे प्रजापति, निषाद, कश्यप, मल्लाह आदि 17 जातियों को नियमों के अधीन जांच कर SC प्रमाण पत्र जारी करना शुरू करें।
*हाईकोर्ट इलाहाबाद द्वारा नोटीफिकेशन करने के बाद*
मामला लगभग ठंडे बस्ते में चला गया था फिर अमूनन तथ्यों की खोजबीन करने के बाद अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान ने जब यह पुष्टि कर लिया कि इन वंचित अतिपिछड़ी जातियों को एससी में शामिल नहीं करना है बल्कि शिल्पकार मझवार तुरैहा तरमाली पासी गोंड धनगर दुसाध समूहों के वंचित उपजातियों को अनुसूचित श्रेणी का जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने की लड़ाई लड़नी चाहिए तो नवंबर 2024 से लगातार 13 अलग-अलग दिन लगातार धरना प्रदर्शन करने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार शासनादेश दिनांक 31 दिसंबर 2016 के क्रम में तत्कालीन जिलाधिकारी संतकबीरनगर श्री महेंद्र सिंह तंवर जी द्वारा कुम्हारों के पिछड़ी जाति प्रमाण पत्र पर रोक लगाते हुए शिल्पकार श्रेणी के अंतर्गत अनुसुचित जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने का आदेश दिनांक 27 फरवरी 2025 को यह कहते हुए जारी किया गया कि आगे चलकर सभी 17 अतिपिछड़ी जातियों को इसका लाभ मिलने लगेगा।
*अपने ही बीच के सत्ता संरक्षण प्राप्त लीडर बने बाधक*
जिलाधिकारी संतकबीरनगर के आदेश के बाद 17 अतिपिछड़ी जातियों में बढ़ता उत्साह देख इन समाजो के सत्ता संरक्षित नेताओं को लगा कि अनिल प्रजापति अतिपिछड़ो का बड़ा चेहरा बनकर उभर न जाए इस नाते आनन फानन में आरक्षण बचाओ संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों को आगे कर जिला जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति से अधिकार क्षेत्र से परे जाकर पेंच फंसाते हुए मामला मंडलीय फोरम में भेज दिया गया और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी से मिलकर उस डीएम का तबादला करवा दिया गया।
*वर्तमान स्थिति क्या है*
मंडल बस्ती के प्रथम अपील से मामला प्रदेश स्तर का होने के नाते नियमानुसार अनुच्छेद 341 के अनुपालन में राज्य स्तरीय अपील में पहुंचा जहां लगभग नौ माह तक अपेक्षित परिणाम न आने से खिन्न लखनऊ बेंच आदेश दिनांक 12.8.2026 जिसमें शिल्पकार की मान्यता प्राप्त 26 उपजातियों का प्रमाण पत्र जारी करना बाध्यकारी बताया गया और उक्त अपील के कंप्लायंस हेतु हाईकोर्ट इलाहाबाद से 14.9.2026 को डायरेक्शन आदेश पारित कराया गया और अन्य अलग अलग रिटें अभी विचाराधीन है इस आशय से कि आवश्यकता पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा लेकिन 17 अतिपिछड़ी जातियों का संवैधानिक आरक्षण लेकर रहेंगे जिसके लिए 4 अक्टूबर को संतकबीरनगर में आयोजित सर्वदलीय महाबैठक चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
सौजन्य से – अनिल कुमार प्रजापति संस्थापक अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान रजि
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