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शासन-प्रशासन, सरकार, विपक्ष, मीडिया और न्यायपालिका से संज्ञान लेने का आग्रह करते हुए, पोस्ट में आरोप लगाया गया है कि पाला बदलकर सत्ता की राजनीति में माहिर अत्याचारी, धनबली और प्रभावशाली लोगों के सामने गरीब, कमजोर और प्रतिभाशाली लोगों का कोई महत्व नहीं रह गया है। न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि भारतीय संविधान पर सामंतवादियों का विधान पूरी तरह हावी है, और हर जगह “जिसकी लाठी उसकी भैंस” वाली कहावत सच हो रही है। पूरा खेल पैसे पर निर्भर हो गया है, जहाँ धनबल वाला ही आज का बादशाह है और योग्यता का कोई मोल नहीं है, बल्कि न्याय बिक रहा है। हालांकि, शासन सत्ता में बैठे नेक आत्माओं और न्यायपालिका पर संविधान को सर्वोपरि मानते हुए भरोसा रखने की बात भी कही गई है।
पोस्ट में कहा गया है कि समाज का निचला तबका भय, भूख, भ्रष्टाचार और भेदभाव के बावजूद लचर कानून व्यवस्था की तिकड़ी को बखूबी समझने लगा है। ऐसे में, लोगों के पास एकजुट होकर दृढ़ संकल्प के साथ संघर्ष करने के अलावा जनहित में कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है, जिसे इक्कीसवीं सदी की जनक्रांति कहा गया है, जो सर्वसमाज के गरीब और कमजोरों पर लागू होती है। यह सारी बातें 4 जुलाई 2026 को जिले में DM, ADM, SDM, LIU, IB, मीडिया और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के बीच एक प्रार्थना पत्र देते समय हुई विधिवत वार्ता पर आधारित हैं। इस वार्ता से यह निष्कर्ष निकाला गया है कि सत्ता संरक्षण प्राप्त कुछ लोग जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के सहारे अत्याचारी, धनबली और प्रभावशाली लोगों को आगे कर आम जनता पर तानाशाही हुकूमत बदस्तूर जारी रखने की दूरगामी कार्ययोजना की ओर अग्रसर हैं।
इस गंभीर स्थिति के बीच, पोस्ट में `WRIT-C 24587/2026` रिट याचिका का उल्लेख है, जो `ADV इन्वेंशन एकेडमी, पुतसर, संतकबीरनगर` से संबंधित है। यह याचिका संभवतः 150 बच्चों के लिए न्याय, स्कूल को डी-सील करने, RTE अधिनियम के तहत अधिकारों, उच्च न्यायालय के आदेश और अवमानना से जुड़े मुद्दों को उठाती है। अनिल प्रजापति और अति पिछड़ा एकीकरण का संदर्भ भी इस मामले से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है, जो शिक्षा के बचाव और भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष पर जोर देता है।
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