*संतकबीरनगर समेत पूरे उत्तर प्रदेश के लेखपाल/तहसीलदार ध्यान दें – कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट के भागीदार बनेंगे!*
साथियों, एक ऐतिहासिक जीत मिली है।
संतकबीरनगर सहित उत्तर प्रदेश में कुम्हार सहित सभी मान्यता प्राप्त उपजातियों के *शिल्पकार श्रेणी के अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र* के आवेदनों को मनमानी तरीके से निरस्त करने वाले लेखपाल/तहसीलदार अब *Contempt of Court* के भागीदार बनेंगे।
*क्या था मामला ?*
तत्कालीन जिलाधिकारी संतकबीरनगर द्वारा जारी आदेश दिनांक 27 फरवरी 2025 के अनुपालन में और लखनऊ बेंच के आदेश दिनांक 12.8.2026 के कंप्लायंस पर प्रमुख सचिव समाज कल्याण विभाग द्वारा हीलाहवाली बरतने एवं समयबद्ध नीति निर्धारण न करने के एवज में अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट में विद्वान अधिवक्ता *श्री दीपक कुमार प्रजापति* के जरिए मैंडमस रिट याचिका दायर की गई थी।
*14 सितंबर 2026 को ऐतिहासिक फैसला -*
*रिट याचिका संख्या 36514/2026 अनिल कुमार प्रजापति बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व 4 अन्य* में सुनवाई के दौरान मा उच्च न्यायालय द्वारा आदेश आया कि शिल्पकार समूह की वंचित उपजातियों के प्रमाण पत्रों से संबंधित प्रमुख सचिव समाज कल्याण विभाग स्तर पर लंबित अपीलों पर त्वरित तथ्यपरक जांच कर फैसला लिया जाए नियमत: 90 दिन के भीतर।
*सबसे बड़ा सवाल -*
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी *शासनादेश दिनांक 31 दिसंबर 2016 अभी निरस्त नहीं हुआ है*, फिर प्रदेश के सभी जिलों में शिल्पकार मझवार तुरैहा तरमाली गोंड धनगर दुसाध समूहों के वंचित उपजातियों में इसका क्रियान्वयन क्यों नहीं ? जबकि *EWS रातोंरात लागू कर दिया गया।*
शासन और सरकार को घिरता देख बेशक गोदी मीडिया एक्टिव मोड में नहीं दिख रही है, किन्तु सच्चाई को कब तक दबाओगे।
*वैसे भी 4 अक्टूबर को संतकबीरनगर में संवैधानिक संरक्षण को लेकर आयोजित सर्वदलीय महाबैठक से इस मसले पर जबरदस्त विस्फोट होना तय है।*
#HighCourtVictory #ShilpkarSC #ContemptOfCourt #AnilPrajapati #4OctoberMahabaithak
अपना राज्य चुनें
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
बिहार
छत्तीसगढ़
दिल्ली
हरियाणा
हिमाचल प्रदेश
जम्मू और कश्मीर
झारखंड
मध्य प्रदेश
राजस्थान
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड