जमरू में मक्का उत्पादन बढ़ाने को लेकर आईआईएमआर का जागरूकता कार्यक्रम
300 से अधिक किसानों ने लिया भाग, 100 किसानों को वितरित किया बायो जिंक और एन पी के
चौरीचौरा गोरखपुर,। भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIMR) ने ब्रह्मपुर ब्लाक के ग्राम पंचायत जमरू में मक्का उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से एक दिवसीय जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 300 से अधिक किसानों ने भाग लिया, जिसमें महिलाओं की भी उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। इस दौरान 100 किसानों को बायो जिंक व एन पी के खाद वितरित किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन “एथेनॉल उद्योगों के कैचमेंट एरिया में मक्का उत्पादन बढ़ाने” परियोजना के तहत किया गया। परियोजना का उद्देश्य किसानों को खरीफ सीजन में मक्का की वैज्ञानिक खेती के लिए प्रोत्साहित करना तथा आधुनिक कृषि तकनीकों, गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों और बेहतर बाजार से जोड़कर मक्का उत्पादन एवं किसानों की आय में वृद्धि करना है।
डॉ. शिवेन्द्र सिंह, वैज्ञानिक, KVK, गोरखपुर, ने किसानों को फसल की अवस्था के अनुसार संतुलित पोषक तत्व एवं सिंचाई प्रबंधन अपनाने की सलाह दी। उन्होंने नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश एवं आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग तथा मिट्टी की जांच के आधार पर उर्वरक प्रबंधन पर जोर दिया।
पायोनियर से अविनाश कुमार ओर सिंजेंटा से अरविंद कुमार ने मक्का की उच्च उत्पादकता वाली किस्मों की जानकारी के साथ बुवाई के करने की विधियों के बारे मे बताया साथ ही सिंचाई की सुविधा वाले क्षेत्रों में फसल की महत्वपूर्ण अवस्थाओं पर पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने तथा खेत में जलभराव से बचने पर जोर दिया।
एथेनॉल उद्योग मक्का किसानों के लिए बन रहा नया बाजार
कार्यक्रम में डॉ. रामनिवास (IIMR) ने बताया कि मक्का का उपयोग खाद्यान्न एवं पशु आहार के साथ-साथ एथेनॉल उत्पादन में भी तेजी से बढ़ रहा है। एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल, विशेष रूप से E20, से देश को ऊर्जा सुरक्षा, विदेशी मुद्रा बचत और पर्यावरण संरक्षण में लाभ मिल रहा है। कीटों की पहचान तथा उनके प्रभावी प्रबंधन नियमित रूप से खेत की निगरानी करके ही किया जा सकता है। फॉल आर्मीवर्म जैसी इल्ली के प्रारंभिक प्रकोप में 5 प्रतिशत नीम तेल का छिड़काव तथा अधिक प्रकोप की स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार इमामेक्टिन बेंजोएट के उपयोग की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि एथेनॉल उद्योग में मक्का की बढ़ती मांग किसानों के लिए एक नया और बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध करा रही है। परियोजना के माध्यम से किसानों और एथेनॉल उद्योगों के बीच संपर्क मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार मिल सके और मक्का उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके।
उन्होंने बताया कि यह परियोजना डॉ. शंकर लाल जाट, वरिष्ठ वैज्ञानिक (IIMR) के निर्देशन में देश के 15 राज्यों में संचालित की जा रही है। जिसके अंतर्गत ब्रह्मपुर ब्लॉक में 25 एकड़ के लिए बीज वितरित किया गया है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य एथेनॉल उद्योगों के कैचमेंट क्षेत्रों में मक्का उत्पादन बढ़ाना तथा किसानों को आधुनिक तकनीकों और बेहतर बाजार से जोड़ना है।
कार्यक्रम में किसानों को जोड़ने में GEAG संस्थान से रवि प्रकाश मिश्रा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और मक्का की समन्वित खेती तथा उत्पादन लागत कम कर किसानों की आय बढ़ाने के विभिन्न उपायों की जानकारी दी।
कार्यक्रम के आयोजक रोहित कुमार (IIMR) ने कहा कि इस प्रकार के जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को वैज्ञानिकों एवं कृषि विशेषज्ञों से सीधे जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करने तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर मक्का की उत्पादकता एवं आय बढ़ाने की अपील की।
चौरीचौरा के विधायक इ सरवन निषाद की पत्नी श्रीमती नेहा निषाद ने किसानों से आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर मक्का की उत्पादकता बढ़ाने का आग्रह किया।
कार्यक्रम में शामिल किसानों ने वैज्ञानिकों एवं कृषि विशेषज्ञों से सीधे जानकारी मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की। किसानों ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से खेत स्तर पर आने वाली समस्याओं के समाधान में मदद मिलती है। उन्होंने भविष्य में भी गांव स्तर पर ऐसे जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की मांग की।
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