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जब क्रोध आए तो अपना स्थान बदल देना चाहिए, इससे क्रोध का प्रवाह रुक जाता है।
काम, क्रोध व मोह सबके अंदर होते हैं, पर इतना ध्यान रखना चाहिए कि हमारे काम व क्रोध से अपने साथ-साथ सामने वाले का भी नुकसान न हो जाए, इस पर नियंत्रण आवश्यक है। परमात्मा की विशेष कृपा से इस पर नियंत्रण हो पाता है: कथाव्यास आचार्य शांतनु जी महाराज
जब क्रोध आए तो अपना स्थान बदल देना चाहिए, इससे क्रोध का प्रवाह रुक जाता है।
काम, क्रोध व मोह सबके अंदर होते हैं, पर इतना ध्यान रखना चाहिए कि हमारे काम व क्रोध से अपने साथ-साथ सामने वाले का भी नुकसान न हो जाए, इस पर नियंत्रण आवश्यक है। परमात्मा की विशेष कृपा से इस पर नियंत्रण हो पाता है: कथाव्यास आचार्य शांतनु जी महाराज
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