17 अतिपिछड़ी जातियों एवं शिल्पकार की मान्यता प्राप्त 26 उपजातियों को उत्तर प्रदेश सरकार जान बूझकर उलझा रही है और हमारे आपसी विघटन को हथियार बनाकर वोट की राजनीति कर रही है। लखनऊ बेंच ने अपने आदेश दिनांक 12.8.2026 में शिल्पकार प्रमाण पत्र जारी करना बाध्यकारी बताया है रहा सवाल इस तथ्यात्मक विषय पर कि वह शिल्पकार है या नहीं तो आरटीआई में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति शोध संस्थान ने भ्रामक रिपोर्ट दिया कि शिल्पकार के उपजातियों का उल्लेख नहीं है जबकि शासनादेश 1957 में स्पष्ट 26 उपजातियों का उल्लेख है जिसे 1994 से रिकार्ड तलब किया गया। मतलब साफ है अपना ईडब्ल्यूएस वगैर किसी साक्ष्य सबूत के रातोंरात लागू और हमारे संवैधानिक हक अधिकार और सामाजिक न्याय को कूचलने का कूटरचित प्रयास आज भी जारी है। अतः वंचित अतिपिछड़े उपेक्षित वर्गों को जातिगत गूटबाजी से उपर उठकर अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान के बैनर तले खड़ा होना होगा, सबूत हमारे पास पुख्ता एवं पर्याप्त है बस कमजोरी है तो एकजुट ताकत का अभाव….
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