योजना के मुताबिक जबरदस्त आग चौतरफा लग चुकी है और प्रजापति समाज को कौन कहे इसकी लपट निषाद और राजभर समाज में आज के डेठ में ही भयंकर रूप से देखने को मिल रही है जबकि विधानसभा चुनाव अभी दूर है। जनहित के मद्देनजर अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान का पहला टारगेट जाति जाति की गुटबाजी में मशगूल पार्टीगत सौदागरों एवं इच्छाधारी मठाधीशों को खत्म करना था और वह परिदृश्य आज सामने देखने को मिल रहा है सार्वजनिक रूप से,कि, लोग जाति के नाम पर सत्ता की मलाई काट रहे नेताओं से प्रश्न करना शुरू कर रहे हैं कि इससे पूरे समाज का क्या लाभ हुआ जबकि संवैधानिक आरक्षण यदि फाइनल हुआ होता तो बच्चा लाभान्वित होता। खैर अभी तो यह ट्रेलर है पूरी पिक्चर आगे देखिए बड़ा मचा आएगा अपने अपने मान राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदेश अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष बनकर घूम रहे इन दगे कारतूसों की बेबश दशा देखकर।
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