आकाशवाणी🙏,
3/9/2026 ई0′,
“विवाह’,
क्या विवाह एक संस्कार है❓
अथवा
एक पारम्परिक परम्परा है❓
विवाह को लोग संस्कार कहते हैं ,
लेकिन उसकी शुरुआत प्राय: सौदेबाजी से प्रारंभ होती है ।
1:-✍️ पहले जाति मिलाई जाती है ,फिर धर्म, उसके बाद वेतन, (सैलरी, / पगार/ ) घर, गाड़ी ,पद प्रतिष्ठा, मान सम्मान एवं रूप (काला/ गोरा/ गोरी) भी देखा जाता है।
2:- व्यक्ति को कुछ कम लगे तो उसे दहेज में पूरा कर लिया जाता है ।
3:- जब मानव समाज अपनी हर इच्छा पूरी कर लेता है ,तब बड़ी श्रद्धा से कहता हैं की जोड़ियां तो भगवान ( ऊपर वाला) बनाकर भेजता है।
4:- अगर जोड़ियां भगवान बनाकर भेजता तो शायद उसके निर्णय पर इतनी आपत्तियां नहीं होती ।
5:- सत्य यह है कि आज भी विवाह तो आत्माओं के मिलन से पहले ,
👉🏾 दो सामाजिक अहंकारों का समझौता बनकर रह गया है ❗
6;- शादी- विवाह की विडंबना देखिए,
➡️ निर्णय मानव के द्वारा किया जाता है,
➡️ भेदभाव समाज करता है ,
➡️ और जिम्मेदारी ईश्वर के ऊपर थोप (डाल) दी जाती है ।
क्या यही विवाह के संस्कार हैं?❌
अपना राज्य चुनें
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
बिहार
छत्तीसगढ़
दिल्ली
हरियाणा
हिमाचल प्रदेश
जम्मू और कश्मीर
झारखंड
मध्य प्रदेश
राजस्थान
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड