कानपुर: ‘सेठ की हवेली सुरक्षित, गरीब दलित के आशियाने पर चला बुलडोजर’ — दोहरा रवैया देख भड़का जनाक्रोश
कानपुर। शहर में प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। जिला प्रशासन और स्थानीय निकाय द्वारा चलाए गए हालिया अतिक्रमण विरोधी अभियान ने निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय ग्रामीणों और पीड़ितों का आरोप है कि प्रशासन ने ‘सेठ की हवेली’ जैसे रसूखदार निर्माणों को छूना तक मुनासिब नहीं समझा, जबकि पास ही बने एक गरीब दलित के झोपड़े और कच्चे मकान को मिनटों में जमींदोज कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
कानपुर के ग्रामीण/शहरी सीमावर्ती इलाके में प्रशासन की टीम पुलिस बल के साथ अवैध कब्जे और अतिक्रमण हटाने पहुंची थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार्रवाई की शुरुआत होते ही बुलडोजर सीधे क्षेत्र के एक निर्धन दलित परिवार के मकान की तरफ बढ़ा। परिवार के लोग अधिकारियों के सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते रहे, रोते-बिलखते रहे, लेकिन दस्ता नहीं रुका और पूरे घर को ध्वस्त कर दिया गया।
वहीं, महज कुछ ही दूरी पर बने एक दबंग/रसूखदार व्यक्ति के बहुमंजिला अवैध निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई, तो अधिकारियों ने ‘नाप-जोख’ और ‘कागजी प्रक्रिया’ का हवाला देकर कोई कार्रवाई नहीं की और बुलडोजर वापस लौट गया।
पीड़ितों और ग्रामीणों का आक्रोश
पीड़ित परिवार का कहना है कि वे बीते कई दशकों से इस जमीन पर रह रहे हैं और उनके पास रहने के लिए कोई दूसरा ठिकाना नहीं है।
”अमीरों की हवेली के लिए प्रशासन के पास सौ कानून और नोटिस की फुर्सत है, लेकिन हम गरीबों के आशियाने पर सीधे बुलडोजर चढ़ा दिया जाता है। हमारा सब कुछ मिट्टी में मिल गया।”
— पीड़ित दलित परिवार
घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन केवल गरीबों और कमजोरों पर अपनी ताकत दिखाता है, जबकि रसूखदारों और भू-माफियाओं की सेटिंग के आगे लाचार नजर आता है।
विपक्ष और सामाजिक संगठनों का हमला
घटना की खबर फैलते ही कई सामाजिक संगठन और विपक्षी नेता मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रशासन के इस दोहरे रवैये की कड़े शब्दों में निंदा की:
भेदभावपूर्ण कार्रवाई: नेताओं ने कहा कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर केवल दलितों और वंचितों को निशाना बनाया जा रहा है।
मुआवजे की मांग: पीड़ित परिवार को तत्काल नया आवास, मुकम्मल आर्थिक सहायता और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
आंदोलन की चेतावनी: चेतावनी दी गई है कि यदि रसूखदार के अवैध निर्माण पर बुलडोजर नहीं चला और पीड़ित परिवार का पुनर्वास नहीं हुआ, तो व्यापक प्रदर्शन किया जाएगा।
प्रशासन का पक्ष
दूसरी ओर, प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि कार्रवाई नियम के अनुसार की गई है। सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए यह अभियान चलाया गया था। अधिकारियों का कहना है कि अन्य निर्माणों की स्थिति की जांच की जा रही है और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, खुले आसमान के नीचे आए पीड़ित परिवार के सामने गुजर-बसर का संकट खड़ा हो गया है और इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया है।
ब्यूरो रिपोर्टर
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