सावन के अंतिम सोमवार पर लोधेश्वर महादेवा धाम में आस्था का सैलाब: डीजे की धुन पर नाचते-गाते पहुंचे डाक कांवड़िया
बाराबंकी: सावन माह के अंतिम सोमवार को प्रसिद्ध तीर्थ स्थल लोधेश्वर महादेवा धाम में शिवभक्तों का असीम उत्साह देखने को मिला। पवित्र सरयू नदी (रामनगर/कटरा घाट) से जल भरकर लाखों की संख्या में कांवड़िया भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने धाम पहुंचे। पूरे मार्ग में “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष के साथ-साथ डीजे की धुन पर नाचते-गाते श्रद्धालुओं ने माहौल को पूरी तरह से शिवमय बना दिया।
इस अपार जनसैलाब के बीच आकर्षण का केंद्र रही ‘डाक कावड़ यात्रा’। आम कांवड़ यात्रा की तुलना में यह यात्रा बेहद कठिन और अनुशासित मानी जाती है।
बिना रुके अनवरत चलती है डाक कांवड़
धाम पहुंचे डाक कांवड़ियों ने अपनी इस विशेष यात्रा का अनुभव साझा करते हुए बताया कि डाक कांवड़ का नियम बेहद सख्त होता है। सरयू नदी से जल उठाने के बाद जब तक भगवान शिव का जलाभिषेक नहीं हो जाता, तब तक यह यात्रा बिना रुके लगातार चलती रहती है।
अनवरत गति: डाक कांवड़िया रास्ते में न तो कहीं विश्राम के लिए बैठते हैं और न ही जलपात्र को जमीन पर रखते हैं।
टीम वर्क: इसमें शिवभक्तों की एक टीम होती है, जो दौड़ते या तेज कदमों से चलते हुए एक-दूसरे को कांवड़ सौंपती रहती है और बिना किसी ठहराव के तय समय सीमा के भीतर मंदिर पहुंचती है।
लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए थे। भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा ताकि डाक कांवड़ियों और सामान्य श्रद्धालुओं को जलाभिषेक करने में कोई असुविधा न हो। अंतिम सोमवार होने के कारण देर रात से ही महादेवा धाम में जलाभिषेक का सिलसिला लगातार जारी रहा।
ब्यूरो चीफ रामानंद सागर
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