जल और साहित्य का समागम ही जीवन दर्शन : प्रो. रामदेव शुक्ल
अखिलभाग्य महाविद्यालय रानापार में आयोजित हुई एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी
ब्रह्मपुर, गोरखपुर। अखिलभाग्य महाविद्यालय रानापार, ब्रह्मपुर में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय ‘प्रो. रामदरश मिश्र के साहित्य में जल, जवार और जीवन के प्रश्न’ रहा।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रो. रामदेव शुक्ल ने कहा कि रामदरश मिश्र की रचनाओं में जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन, संघर्ष और अस्तित्व का प्रतीक है। वहीं ‘जवार’ उनके साहित्य में लोक जीवन, सामुदायिक संबंधों और अपनी मिट्टी से जुड़ी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि जल और साहित्य का समागम ही जीवन दर्शन है।
विशिष्ट अतिथि प्रो. संजीव दूबे, डॉ. ओम निश्चल, डॉ. वेद प्रकाश पांडेय और प्रो. चितरंजन मिश्र सहित अन्य विद्वानों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा कि प्रो. रामदरश मिश्र का समय साहित्यिक आंदोलनों का काल था, लेकिन वे आंदोलनों के दलदल में नहीं फंसे। उनका स्वभाव जड़ तत्व में दिखाई पड़ता है। उन्होंने कहा कि पानी की तरह वे अपना स्तर तुरंत बना लेते थे।
स्वागत भाषण प्रो. स्मिता मिश्र ने दिया। आभार ज्ञापन महाविद्यालय के प्रबंधक डॉ. सुधीर कुमार राय ने किया, जबकि संचालन डॉ. गौरव तिवारी ने किया।
संगोष्ठी के द्वितीय सत्र की अध्यक्षता संयुक्त रूप से प्रो. रामदरश राय और प्रो. अनिल राय ने की। इस सत्र में प्रो. दीपक प्रकाश त्यागी, हरिशंकर राठी सहित अन्य विद्वानों ने अपने विचार रखे। संचालन डॉ. अखिल मिश्र ने किया। आभार ज्ञापन महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. रागिनी राय एवं डॉ. हरिलाल ने किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय स्तर पर गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाली छात्राओं आरती यादव, प्रियंका विश्वकर्मा, रोशनी गुप्ता और निधि यादव को सम्मानित किया गया। उत्कर्ष अग्निहोत्री एवं कृष्ण बिहारी पाठक को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. वेदमित्र शुक्ल, हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. विमलेश मिश्र, अल्का सिन्हा, शशिबिंदु नारायण मिश्र, प्रो. जसवीर त्यागी, मनोज कुमार सिन्हा, अंजली तिवारी, के.पी. सिंह सहित अन्य विद्वान उपस्थित रहे।
अपना राज्य चुनें
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
बिहार
छत्तीसगढ़
दिल्ली
हरियाणा
हिमाचल प्रदेश
जम्मू और कश्मीर
झारखंड
मध्य प्रदेश
राजस्थान
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड