बाथरूम में निकला जहरीला सांप, पकड़ने पहुंचे बुजुर्ग को डसा; इलाज के बजाय झाड़-फूंक, मौत
पश्चिम चंपारण के गौनाहा प्रखंड से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। धमौरा स्थित अनुसूचित जनजाति आवासीय विद्यालय के बाथरूम में जहरीला सांप निकलने के बाद उसे पकड़ने पहुंचे एक बुजुर्ग की सांप के डसने से मौत हो गई। मृतक की पहचान धमौरा गांव निवासी बिंदा महतो के रूप में हुई है।
बताया जा रहा है कि आवासीय विद्यालय के बाथरूम में जहरीला सांप दिखाई दिया था। इसके बाद विद्यालय प्रबंधन ने सांप को पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम को बुलाने के बजाय गांव से बिंदा महतो को बुलाया। प्रधानाध्यापक के अनुसार, बिंदा महतो पहले भी सांप पकड़ने का काम करते थे।
बिंदा महतो जब सांप को पकड़ने पहुंचे, तभी सांप ने उन्हें डस लिया। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। मृतक की पत्नी मनतुरनी देवी का आरोप है कि बिंदा के विद्यालय पहुंचने से पहले ही सांप पर हमला किया गया था, जिससे वह गुस्से में था और पकड़ने के दौरान उसने उनके पति को डस लिया।
हालांकि, विद्यालय के प्रधानाध्यापक राघवेंद्र मोहन झा ने इस बात से इनकार किया है। उनका कहना है कि बिंदा महतो ने सांप को पकड़ लिया था और वह बिल्कुल ठीक हालत में विद्यालय से अपने घर चले गए थे।
सबसे बड़ा सवाल इसके बाद सामने आया, जब सांप के डसने के बाद बिंदा महतो को तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय परिजन उन्हें झाड़-फूंक के लिए मैनाटांड़ प्रखंड के ब्रिंची गांव ले गए। वहां उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और आखिरकार उनकी मौत हो गई।
मौत के बाद परिजन उन्हें गौनाहा अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
बिंदा महतो की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। वहीं, ग्रामीणों के अनुसार सांप के काटने से मौत होने के बाद शव को दफनाने की मान्यता के चलते परिजनों ने शव को डोहरम नदी के किनारे दफना दिया।
फिलहाल इस दर्दनाक घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं आखिर जहरीले सांप के रेस्क्यू के लिए प्रशिक्षित वन विभाग की टीम को क्यों नहीं बुलाया गया और सांप के डसने के बाद पीड़ित को तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक का सहारा क्यों लिया गया।
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