*आरक्षण नहीं तो वोट नहीं – नारा सही, रास्ता गलत तो परिणाम जीरो – अनिल कुमार प्रजापति*
आगरा में उमड़ा निषाद समाज का विशाल जनसैलाब बता रहा है कि उत्तर प्रदेश में “आरक्षण नहीं तो भाजपा को वोट नहीं” का नारा अब जमीन पर बुलंद हो चुका है। निषाद समाज बंधुओं का यह जज्बा वंदनीय है, बाकी वंचित वर्ग भी अपने-अपने हिसाब से लड़ रहा है।
*लेकिन एक कड़वी सच्चाई समझिए -*
आरक्षण खाली सड़क पर भीड़ जुटाने, मीडिया में हवा बनाने और अपने-अपने मान, जातिगत गुटबाजी और वोट की सौदेबाजी से नहीं मिलता। उसके लिए *अनुच्छेद 341 का धरातलीय अनुपालन* नियमानुसार आवश्यक है।
यह काम अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान रजि.के अलावा आज तक कोई नहीं कर पाया, इसी वजह से सरकार चाहकर भी उत्तर प्रदेश में 17 अतिपिछड़ी जातियों के बहुप्रतीक्षित रिजर्वेशन प्रकरण पर कोई ठोस निर्णय नहीं ले पा रही है।
*याद रखिए, मामला नया शामिल करने का नहीं है।*
हम शिल्पकार समूह की 26 उपजातियां व 17 अतिपिछड़ी जातियों के लोग *संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश 1950 से ही अनुसूचित जाति में शामिल हैं*। मामला सिर्फ उत्तराखंड के शिल्पकार आरक्षण की तर्ज पर UP में भी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने का है, जो DM संतकबीरनगर ने 27.02.2025 को करके दिखा दिया।
इसलिए वंचित, अतिपिछड़े, उपेक्षित वर्गों के सभी आरक्षण समर्थकों से निवेदन है – अपनी-अपनी डफली और अपना-अपना राग अलापने से कोई फायदा नहीं। समाज पूर्व की भांति लालीपाप के सहारे छलावे का शिकार होता रहेगा।
*आइए, जाति जाति की गुटबाजी से उपर उठकर अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान के बैनर तले एकजुट आवाज बुलंद करें क्योंकि देश में असली लड़ाई अमीरी और गरीबी से है। संघर्ष हमारा, सहयोग आपका। मूवमेंट का तन-मन-धन से समर्थन करें।*
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