*अनिल प्रजापति का खुला ऐलान – अभी नहीं तो कभी नहीं!*
यदि निषाद / कश्यप / राजभर सहित अन्य संगठित वर्गों की तरह लड़ाकू और संगठित कुम्हार समेत शिल्पकार की सभी 26 उपजातियां होती, तो कब का शैक्षणिक सुधार के साथ आरक्षण निर्विवाद रूप से लागू हो गया होता, बिना किसी नेतागिरी के, सिर्फ संवैधानिक संघर्ष के दम पर।
आज जो तस्वीर बहन मायावती जी और चिराग पासवान जी की दिख रही है, यह कोई सामान्य तस्वीर नहीं है। यह विधानसभा चुनाव 2027 के लिए बहुत बड़ा संकेत है। इंडिया गठबंधन को कमजोर कर, तीसरा फ्रंट खड़ा करने की योजनाबद्ध तैयारी है, ताकि चुनाव बाद यदि आवश्यकता पड़े तो सरकार बनाने की नई साझेदारी तय हो सके।
ऐसी स्थिति में लगभग 40% आबादी वाला वंचित, अतिपिछड़ा, उपेक्षित वर्ग ही निर्णायक गेम चेंजर सिद्ध होगा, बशर्ते वह एकीकरण की राह पर चल पड़े तो।
*अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान का दावा है -*
यदि शिल्पकार समूह की सभी 26 मान्यता प्राप्त जातियां एकजुट होकर आंदोलन को ताकत दे दें, तो 2 से 3 माह के अंदर शैक्षिक सुधार व आरक्षण का किला निर्विवाद रूप से फतेह हो जाएगा। और इसी मॉडल पर मझवार, तुरैहा, तरमाली, गोंड, धनगर, दुसाध समूहों की सभी वंचित जातियां अपने आप आरक्षण के लाभ से लाभान्वित होने लगेंगी। रहा सवाल आरक्षण कोटा बढ़ाने का तो जाति जनगणना 2027 के बाद शुलभ आप्शन सुरक्षित है उसके बाद दलित राजनीति का जलजला आएगा अन्यथा का परिणाम सामने है।
*संघर्ष हमारा, सहयोग आपका।*
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