महुली पुलिस का संकल्प: हर बहू-बेटी की सुरक्षा, सम्मान और स्वाभिमान
बहू-बेटी सम्मेलन में महिलाओं को किया जागरूक, एंटी रोमियो अभियान में 37 लोगों से पूछताछ
ब्यूरो: अश्विनी कुमार पाण्डेय | संतकबीरनगर
महुली थाना क्षेत्र में महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण को लेकर मिशन शक्ति फेज-5.0 के तहत जागरूकता अभियान लगातार चलाया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीणा के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन, क्षेत्राधिकारी धनघटा अभय नाथ मिश्र के पर्यवेक्षण तथा थानाध्यक्ष दुर्गेश पाण्डेय के नेतृत्व में मंगलवार को नाथनगर ब्लॉक में बहू-बेटी सम्मेलन का आयोजन किया गया।
सम्मेलन में उपनिरीक्षक नागेंद्र पाण्डेय, महिला मुख्य आरक्षी पुष्पा यादव, पीआरडी उषा एवं एसीसी जामवंत ने महिलाओं और बालिकाओं को मिशन शक्ति के उद्देश्यों, महिला सुरक्षा कानूनों तथा आत्मरक्षा के प्रति जागरूक किया। पुलिस टीम ने कहा कि जागरूकता ही सुरक्षा की पहली सीढ़ी है और अपने अधिकारों की जानकारी महिलाओं को सशक्त बनाती है।
योजनाओं और अधिकारों की दी जानकारी
सम्मेलन में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, रानी लक्ष्मीबाई बाल एवं महिला सम्मान कोष, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, निराश्रित महिला पेंशन योजना तथा मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
इसके साथ ही गुड टच-बैड टच, घरेलू हिंसा, महिला अपराध तथा साइबर अपराध से बचाव के उपाय भी बताए गए। महिलाओं से अपील की गई कि किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या अपराध की सूचना बिना संकोच पुलिस अथवा संबंधित हेल्पलाइन पर दें।
हेल्पलाइन नंबर किए साझा
पुलिस ने महिलाओं और बालिकाओं को 1090 वूमेन पावर लाइन, 112 पुलिस आपातकालीन सेवा, 181 महिला हेल्पलाइन, 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन, 108 एंबुलेंस, 102 स्वास्थ्य सेवा, 1076 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तथा 1930 साइबर हेल्पलाइन की जानकारी देकर इनके उपयोग के बारे में जागरूक किया।
एंटी रोमियो अभियान में कार्रवाई
महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए थाना महुली पुलिस ने क्षेत्र के तीन स्थानों पर एंटी रोमियो चेकिंग अभियान चलाया। अभियान के दौरान कुल 37 व्यक्तियों से पूछताछ की गई। इनमें तीन लोगों से माफीनामा भरवाया गया, दो व्यक्तियों के विरुद्ध धारा 170 बीएनएसएस के तहत कार्रवाई की गई, जबकि 32 लोगों को कड़ी चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।
महुली पुलिस ने कहा कि बेटियां बोझ नहीं, बल्कि समाज की शक्ति हैं। पुलिस का उद्देश्य अपराध होने के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं, बल्कि जागरूकता, रोकथाम और महिलाओं में सुरक्षा का विश्वास मजबूत करना है, ताकि क्षेत्र की हर बहू-बेटी स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त महसूस कर सके।
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