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कुशीनगर जिले के सुकरौली विकासखंड स्थित ग्राम सभा नाउमुंडा में बदहाल जलनिकासी व्यवस्था के कारण ग्रामीणों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। गांव की गलियों और सड़कों पर लगातार गंदा पानी जमा रहने से लोगों को घरों से बाहर निकलने में भारी परेशानी हो रही है, जिसका सबसे अधिक खामियाजा बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, यह समस्या केवल बरसात तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे साल बनी रहती है।
ग्रामीणों ने बताया कि घरों से निकलने वाला पानी नालियों के माध्यम से गांव की पोखरियों में पहुँचता है, लेकिन गांव की तीनों पोखरियां पूरी तरह से भरी हुई हैं, जिससे पानी की निकासी बाधित हो गई है। इसी कारण गंदा पानी सड़कों और गलियों में फैल जाता है, और बरसात के मौसम में तो स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। इस जलभराव से न केवल आवागमन प्रभावित हो रहा है, बल्कि संक्रामक बीमारियों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है।
एक ओर जहाँ प्रदेश सरकार स्वच्छ भारत मिशन और ग्रामीण स्वच्छता अभियान के तहत गांवों में जलभराव रोकने, नालियों की सफाई कराने और पोखरियों को अतिक्रमण मुक्त करने पर जोर दे रही है, और बारिश के मौसम के मद्देनजर भी जलभराव न होने देने के निर्देश दिए गए हैं, वहीं नाउमुंडा गांव के हालात सरकारी दावों से बिलकुल उलट हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों से इस समस्या की शिकायत की है, फिर भी अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
ग्राम प्रधान ने बताया कि पोखरियों की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था को ठीक करने के लिए कई बार प्रयास किए गए हैं। इस मामले का निरीक्षण खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) द्वारा भी किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ग्राम सभा में मौजूद तीनों पोखरियों की स्थिति एक जैसी है और उनके सफाई व पुनर्जीवन के बार-बार किए गए प्रयास विभिन्न कारणों से आगे नहीं बढ़ पाए।
ऐसे में ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल पोखरियों की सफाई कराने और जलनिकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसा करने से ही गांव को जलभराव की समस्या से स्थायी राहत मिलेगी और लोगों को स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण मिल पाएगा।
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