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उत्तर प्रदेश में बुलडोजर कार्रवाई और कानून-व्यवस्था के दोहरे रवैये को लेकर सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से तीखे सवाल खड़े किए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि फाइलों और कागजी दावों से इतर धरातल की हकीकत यह है कि सत्ता का संरक्षण प्राप्त धनबली और प्रभावशाली लोगों पर कोई नियम-कानून लागू नहीं होता। गरीब की शिकायतों को शिक्षा विभाग और तहसील में कूड़ेदान में फेंक दिया जाता है और जिलाधिकारी भी सुनवाई नहीं करते।
प्रदेश के गांवों की सच्चाई बयां करते हुए कहा गया है कि भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से भू-माफिया ग्राम समाज व सार्वजनिक जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं। वहीं नकल माफिया कक्षा 5 की मान्यता पर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट तक की कक्षाएं चलाकर मनमानी लूट-खसोट में लगे हैं। संतकबीरनगर की धनघटा तहसील का विशेष रूप से जिक्र करते हुए कहा गया है कि वहां खुलेआम यह माना जाता है कि बुलडोजर और कानूनी कार्रवाई सिर्फ कमजोरों के लिए है, बड़े दबंगों के लिए नहीं। भूमि प्रबंधन समिति में जहां प्रधान खुद अतिक्रमणकारी है, वहां लेखपाल केवल ‘हक-दस्तूर’ देखते हैं, न्याय और संविधान नहीं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए मांग की गई है कि भू-माफियाओं और शिक्षा माफियाओं पर बिना किसी भेदभाव के समान रूप से कार्रवाई की जाए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि अगर व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो विधानसभा चुनाव 2027 में जनता इस बुलडोजर को न्याय का नहीं बल्कि भेदभाव का प्रतीक करार देगी।
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