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लोकतंत्र, जवाबदेही, शांतिपूर्ण विरोध और नागरिकों की आवाज़ के महत्व को रेखांकित करते हुए एक भावनात्मक और विचारोत्तेजक संदेश सामने आया है, जिसमें यह सवाल उठाया गया है कि क्या लोकतंत्र में सवाल पूछना गलत है। इस संदेश में स्पष्ट कहा गया है कि ‘अगर सवाल पूछना गुनाह है… तो हम भी गुनहगार हैं।’ यह पूरा संबोधन लोकतांत्रिक मूल्यों, संविधान, नागरिक अधिकारों और शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति के समर्थन में सार्वजनिक चर्चा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। इसके साथ ही यह भी साफ किया गया है कि इसका उद्देश्य किसी भी व्यक्ति या समुदाय के प्रति नफ़रत या हिंसा फैलाना नहीं है, बल्कि जनता की आवाज़ और जवाबदेही को प्रमुखता से उठाना है।
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