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रेलवे के निजीकरण को रोकने के लिए महा अधिवेशन में बहस काफी तेज हो गई है। देश की अनेक संस्थाओं और विभागों को लगातार निजी हाथों में सौंपकर ठेकेदारी प्रणाली को बढ़ावा देने की भाजपा सरकार की नीति को लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए एक बड़ी चुनौती बताया गया है।
सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा गया है कि अटल बिहारी वाजपेई ने कर्मचारियों की पेंशन खा डाली और आज नरेंद्र मोदी युवाओं का रोजगार खा रहे हैं, जो बहुत ही खतरनाक संकेत है। इस निजीकरण और ठेकेदारी व्यवस्था के खिलाफ जनता को एकजुट होकर अपने अधिकारों की ताकत दिखानी होगी।
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