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नगीना लोकसभा सीट से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद आरक्षण के मुद्दे पर लगातार आक्रामक रुख अपनाते रहे हैं।
आरक्षण में किसी भी प्रकार की कटौती, उप-वर्गीकरण (Sub-categorization) या इसे कमजोर करने की कोशिशों पर उनका रुख बेहद कड़ा रहा है:
मुख्य बिंदु:
संवैधानिक अधिकारों पर हमला: चंद्रशेखर आजाद का कहना है कि सरकार और व्यवस्था षड्यंत्र के तहत अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण और अधिकारों को निष्प्रभावी बनाने की कोशिश कर रही है।
आर्थिक आधार का विरोध: एससी/एसटी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट और सरकार के विभिन्न फैसलों/बहसों पर बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट किया है कि दलित और वंचित समाज के आरक्षण का आधार सामाजिक पिछड़ापन है, न कि आर्थिक। इसमें क्रीमी लेयर या वर्गीकरण जैसी व्यवस्था लागू करने का उन्होंने कड़ा विरोध किया है।
प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण की मांग: उनका मानना है कि सरकारी नौकरियों का निजीकरण (Privatization) करके आरक्षण के अवसरों को खत्म किया जा रहा है। इसलिए उन्होंने निजी क्षेत्र (Private Sector) में भी एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण लागू करने की मांग उठाई है।
सड़क से संसद तक आंदोलन की चेतावनी: चंद्रशेखर आजाद ने चेतावनी दी है कि यदि बहुजन समाज के आरक्षण और हकों पर कोई डाका डालने की कोशिश की गई, तो वे देश भर में बड़ा आंदोलन खड़ा करेंगे और अपने समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जाने को तैयार हैं।
वह लगातार जातिगत जनगणना कराने और संख्या के अनुपात में भागीदारी (जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी) देने की मांग पर भी अड़े हुए हैं।
ब्यूरो रिपोर्टर
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