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चतरा जिले के हंटरगंज थाना क्षेत्र के डटमी गांव में मंगलवार सुबह करीब नौ बजे वर्षों पुराने जमीन विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, जिसमें एक अधेड़ व्यक्ति की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। यह घटना खेत की जुताई के दौरान हुई, जिसके बाद पूरे गांव में दहशत और शोक का माहौल व्याप्त है। पुलिस ने मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, डटमी गांव के कैलाश यादव और उनके भाई विलास यादव के बीच जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था, जिसके समाधान के लिए कई बार गांव स्तर पर पंचायतें भी हुई थीं, पर कोई स्थायी हल नहीं निकला। मंगलवार सुबह कैलाश यादव विवादित खेत में हल-बैल से जुताई कर रहे थे, तभी दूसरे पक्ष के लोग वहाँ पहुँचे और जुताई का विरोध करने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी हुई, जो कुछ ही देर में हिंसक झड़प में बदल गई। आरोप है कि कैलाश यादव उस समय खेत में अकेले थे, जिसका फायदा उठाकर हमलावरों ने उन पर लाठी-डंडों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। गंभीर चोटें लगने से वे खेत में ही गिर पड़े और कथित तौर पर तब तक पीटा गया जब तक उनकी मौत नहीं हो गई।
मृतक के परिजनों ने विलास यादव, मिथलेश यादव, मालों देवी, सुनीता देवी और मनीष कुमार पर सामूहिक रूप से जानलेवा हमला कर हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। सूचना मिलने के बाद हंटरगंज थाना सब इंस्पेक्टर नितेश प्रसाद और भोला साह दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल चतरा भेज दिया। थाना प्रभारी प्रभात कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच मारपीट की पुष्टि हुई है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हुई है। पुलिस सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित किया है कि जमीन संबंधी विवादों का समय रहते कानूनी और शांतिपूर्ण समाधान न होने पर वे गंभीर अपराधों का रूप ले सकते हैं। प्रशासन और समाज दोनों की यह जिम्मेदारी है कि ऐसे विवादों का समाधान बातचीत, पंचायत और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से कराएँ, और आम लोगों को भी कानून अपने हाथ में लेने के बजाय संबंधित प्रशासनिक व न्यायिक संस्थाओं का सहारा लेना चाहिए, क्योंकि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं, बल्कि नए दुख और अपराध को जन्म देती है।
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