*अतिपिछड़ों की गुलामी का असली कारण – मंथन जरूरी!*
*अनिल कुमार प्रजापति, संस्थापक – अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान (रजि.)*
साथियों, अब तक के दूरगामी संघर्षों ने एक कड़वा सच सिखाया है –
*यह समाज सामूहिक विकास और संवैधानिक अधिकार की लड़ाई को महत्व नहीं देता, बल्कि ‘फूट डालो राज करो’ की कूटनीति में उलझकर आस्था का शिकार हो जाता है।*
यही कारण है कि मेहनतकश शिल्पकार कौम इतनी बड़ी आबादी के बावजूद आज दीन-हीन दशा में पड़ी है।
आज सोशल मीडिया पर देखिए – हमारा समाज दो हिस्सों में बंटा है:
*1. एक वो जो थोड़ा कमाने-खाने लायक हुआ तो खुद को राजा-महाराजा का खानदान समझने लगा।* उससे पूछो – जब तुम्हारे पूर्वज राजा थे, तो आज तुम्हारी ये दुर्दशा क्यों? जो समाज आगे रहा है, उसकी अग्रसारिता आज भी किसी न किसी रूप में दिखती है।
*2. दूसरा वो जो जयंती समारोह के नाम पर अपनी राजनीति चमकाता है।*
उनसे पूछो – *डॉ. बी.आर. अम्बेडकर और डॉ. रत्नप्पा कुम्हार* के अथक प्रयास से वंचित अतिपिछड़ों के उत्थान के लिए देश में साइमन कमीशन का सर्वे शुरू हुआ था। तब कुछ मूर्खों ने खुद को ‘नीची जाति में जाना’ कहकर अस्पृश्यता, असमानता, छुआछूत के कलंक को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और खुद को सवर्ण घोषित करने लगे। उसी भूल का परिणाम आज हम भुगत रहे हैं।
आज भी वही मानसिक गुलाम पुनरावृत्ति दोहरा रहे हैं – उन्हें ये भी नहीं पता कि *शिल्पकार आरक्षण क्या है और EWS क्या है?* हवा में आरक्षण खोज रहे हैं।
*लेकिन अब इतिहास बदल चुका है!*
*कल दिनांक 14 सितंबर 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूरे उत्तर प्रदेश के लिए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है – शिल्पकार, मझवार, तुरैहा, तरमाली, गोंड, धनगर, दुसाध समूह की सभी वंचित उपजातियों के सामूहिक उत्थान के लिए!*
*WRIT-C No. 36514/2026 (Anil Kumar Prajapati Vs State of UP)*
माननीय न्यायालय ने स्पष्ट आदेश दिया है – *”प्रमुख सचिव, समाज कल्याण, लखनऊ में SC प्रमाण पत्र से संबंधित जितनी भी राज्य स्तरीय अपीलें लंबित हैं, उन्हें निर्धारित समय में तय किया जाए।”*
और यहीं पर *लखनऊ बेंच का आदेश दिनांक 12.08.2026* अत्यंत प्रभावशाली हो जाता है, जिसमें कहा गया है कि शिल्पकार श्रेणी की मान्यता प्राप्त उपजातियों का SC प्रमाण पत्र निर्गत करना बाध्यकारी है।
*तथ्यात्मक रामबाण -*
तत्कालीन *जिलाधिकारी संतकबीरनगर का आदेश दिनांक 27 फरवरी 2025* – जो अनुच्छेद 341 के अनुपालन में है – खासतौर पर कुम्हारों के लिए ब्रह्मास्त्र है। इसी आदेश के अनुपालन में लंबित राज्य स्तरीय अपील के न्यायसंगत निस्तारण हेतु यह मैंडमस रिट दायर हुई थी।
*और सबसे बड़ी बात -*
यह लड़ाई 17 अतिपिछड़ी जातियों के लिए इसलिए उपयोगी है क्योंकि यह *उत्तर प्रदेश सरकार कार्मिक अनुभाग-2 के शासनादेश दिनांक 31 दिसंबर 2016* के अनुकूल है, जिसमें कुम्हार समेत 17 जातियों को पिछड़ी सूची से बाहर निकालकर अनुसूचित वर्गों के समान सुविधा का अधिकारी बताया गया है।
*अतः समाज से अपील -*
सोशल मीडिया पर हवा में आरक्षण का लाभ खोजने वाले और आरक्षण दिलाने के नाम पर हू-हल्ला मचाकर निजी स्वार्थ की राजनीति करने वाले *पार्टीगत दलालों और इच्छाधारी मठाधीशों* से बचें!
यह लड़ाई किसी पार्टी की नहीं, संविधान की है।
*आओ, 04 अक्टूबर 2026, रविवार, जिला मुख्यालय संतकबीरनगर में संवैधानिक संरक्षण हेतु आयोजित सर्वदलीय महाबैठक का हिस्सा बनो।*
हम पूरे विश्वास के साथ आश्वस्त करते हैं – *संख्यात्मक कोटा बढ़ाते हुए आरक्षण लेकर रहेंगे, बेशक सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़े!* धन्यवाद!
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