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इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक एतिहासिक फैसले ने 27 फरवरी 2025 को तत्कालीन जिलाधिकारी संतकबीरनगर द्वारा अनुच्छेद 341 के अनुपालन में निर्गत आदेश के अनुरूप कुम्हारों को पिछड़ी जाति प्रमाण पत्र पर रोक लगाते हुए शिल्पकार श्रेणी के अंतर्गत अनुसुचित जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने के बहुचर्चित मामले में नया मोड़ खड़ा कर दिया है। जो नियमानुसार मंडलीय अपील मय राज्य स्तरीय अपील से होते हुए मा उच्च न्यायालय में पहुंचा है।
क्योंकि संतकबीरनगर जिले में आपत्ति के पहले जितने भी आवेदन मनमानी तरीके से निरस्त किए गए हैं उनमें से किसी एक में भी संबंधित लेखपाल/कानूनगो अथवा तहसीलदार द्वारा आनलाइन आवेदन निरस्त करने का स्पष्ट कारण किसी भी रूप में संबंधित आवेदकों को लिखित तौर पर अवगत नहीं कराया गया है जो नियम पुरे प्रदेश में लागू होता है।
अतः इलाहाबाद हाईकोर्ट में वंचित अतिपिछड़ी जातियों के मुख्य आधार कुम्हार/शिल्पकार आरक्षण को लेकर तत्परता से पैरवी कर रहे विद्वान अधिवक्ता श्री दीपक कुमार प्रजापति एवं उनकी टीम ने गहन मंत्रणा एवं विचार विमर्श तेज कर दिया है कि कैसे उन जायज तथ्यों को प्रकाश में लाते हुए अनुसूचित जाति संविधान 1950 के अनुरूप इन वंचित जातियों को संवैधानिक आरक्षण लाभ दिलाया जा सकता है ताकि पुर्व की भांति इस बार यह बहुप्रतीक्षित रिजर्वेशन प्रकरण फेल न करने पाए।
सौजन्य से – अनिल कुमार प्रजापति संस्थापक अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान रजि. मो. नं. 9005329144
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