गुस्से के शब्दों का असर
पुणे। मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण ऑर्गनाइजेशन के रिपोर्टर सूर्य प्रकाश पाण्डेय ने कहा कि गुस्से में बोले गए शब्द भले ही उस क्षण मन का आक्रोश बाहर निकालकर कुछ पल का सुकून दे दें, लेकिन उनके दुष्प्रभाव और घाव लंबे समय तक बने रह सकते हैं।
उन्होंने कहा कि क्रोध के समय इंसान कई बार ऐसे शब्द बोल देता है, जिन्हें बाद में वापस लेना संभव नहीं होता। एक कठोर वाक्य रिश्तों में दूरी, मन में पीड़ा और आपसी विश्वास में दरार पैदा कर सकता है। इसलिए किसी भी परिस्थिति में प्रतिक्रिया देने से पहले कुछ क्षण शांत रहना आवश्यक है।
सूर्य प्रकाश पाण्डेय ने कहा, “गुस्सा कुछ पल का होता है, लेकिन गुस्से में बोले गए शब्दों का असर बहुत लंबे समय तक रह सकता है। इसलिए बोलने से पहले सोचें, क्योंकि शब्द वापस नहीं आते।”
उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि मतभेदों को बातचीत, संयम और समझदारी से सुलझाएं तथा अपने शब्दों से किसी के दिल को ठेस न पहुंचाएं। संयमित वाणी ही मजबूत रिश्तों और शांतिपूर्ण समाज की आधारशिला है।
— मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण ऑर्गनाइजेशन
रिपोर्टर सूर्य प्रकाश पाण्डेय
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