रक्षाबंधन पर सूर्या अकैडमी खलीलाबाद में भाई बहन के स्नेह की मिठास नन्हीं बच्चियों ने बाधी राखी
राखी के पवित्र धागे के साथ भाइयों ने लिया बहनों की सुरक्षा और सम्मान का संकल्प
भारतीय संस्कृति और संस्कारों से बच्चों को जोड़ना शिक्षा का अहम हिस्सा : डॉ. उदय प्रताप चतुर्वेदी
संतकबीरनगर। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर संतकबीरनगर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान सूर्या इंटरनेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, खलीलाबाद में भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का पर्व हर्षोल्लास एवं सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया गया। विद्यालय परिसर में ‘मेरी राखी का मतलब है प्यार भैया…’ की मधुर धुन के बीच बच्चों ने उत्साहपूर्वक रक्षाबंधन पर्व की खुशियां साझा कीं।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की नन्हीं-मुन्नी बच्चियों ने अपने सहपाठी भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके सुखद, स्वस्थ एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की। भाइयों ने भी बहनों के सम्मान, सुरक्षा और सहयोग का संकल्प लिया। राखी बांधने के बाद बच्चों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर पर्व की खुशियां साझा कीं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सूर्या ग्रुप चेयरमैन डॉ. उदय प्रताप चतुर्वेदी ने कहा कि रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के रिश्ते की मर्यादा, प्रेम और नैतिक मूल्यों को अभिव्यक्त करने वाला महत्वपूर्ण पर्व है। उन्होंने कहा कि अपनी सांस्कृतिक विरासत, मर्यादा और संस्कारों को आत्मसात किए बिना कोई भी व्यक्ति सच्चे अर्थों में संस्कारित नागरिक नहीं बन सकता। उन्होंने छात्र-छात्राओं एवं जनपदवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए भारतीय संस्कृति की इस समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
विद्यालय एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर सविता चतुर्वेदी ने राखी बांधने वाली बच्चियों को उपहार देकर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास के प्रतीक रक्षाबंधन पर्व की महत्ता से बच्चों को परिचित कराने के उद्देश्य से विद्यालय में प्रत्येक वर्ष इस तरह के आयोजन किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि किताबी ज्ञान और खेलकूद के साथ बच्चों को भारतीय संस्कृति, संस्कार और मानवीय मूल्यों से जोड़ना संस्थान की प्राथमिकता है।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य रविनेश श्रीवास्तव, नितेश द्विवेदी, आरती चौधरी और आशुतोष पाण्डेय सहित विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम ने बच्चों के बीच प्रेम, भाईचारे और सांस्कृतिक संस्कारों की भावना को और मजबूत किया।
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