संतकबीरनगर के धनघटा तहसील के पुतसर स्थित एडीवी इन्वेंशन एकेडमी को अवैध रूप से सील करने वाले एसडीएम रविकांत चौबे के ट्रांसफर को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शासन स्तर से जारी तबादला सूची में लखनऊ की एसडीएम शिप्रापाल जी का संतकबीरनगर आना तो दर्ज है, लेकिन इस सूची में एसडीएम रविकांत चौबे का नाम कहीं नहीं है। इसके बावजूद जिला प्रशासन द्वारा रविकांत चौबे का बुलंदशहर ट्रांसफर होने की बात फैलाई जा रही है। इस पर तीखा विरोध जताते हुए इसे ट्रांसफर नहीं, बल्कि अपराध छिपाने का हथकंडा और भ्रष्टाचार का इनाम बताया जा रहा है।
इस पूरे मामले को एफआईआर, जेल और कोर्ट के डर से बचाने के लिए रचा गया ‘गुप्त ट्रांसफर’ करार दिया गया है, जिसे शासन को अंधेरे में रखकर मिलीभगत से अंजाम दिया गया है। वर्तमान में ‘एडीवी इन्वेंशन एकेडमी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ का मामला कोर्ट में लंबित है, जिसमें 22.06.2026 तक स्टे और 14.07.2026 तक संशोधन/इम्पलीडमेंट की तारीख है। कोर्ट में इस मामले के अधिवक्ता श्री विष्णु शंकर गुप्ता जी हैं।
इस धांधली को लेकर डीएम संतकबीरनगर से जवाब मांगा गया है कि बिना शासनादेश के यह ट्रांसफर किस नियम और किसके आदेश पर किया गया? मामले में मांग की गई है कि एसडीएम रविकांत चौबे सहित सभी दोषियों पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए। साथ ही, पीड़ित विद्यालय को तुरंत डी-सील करके उसे डीम्ड औपबंधिक मान्यता और यूडाइस कोड आवंटित किया जाए। लोग #धनघटा_एसडीएम_घोटाला और #भ्रष्टाचार_का_इनाम_ट्रांसफर जैसे नारों के साथ सवाल उठा रहे हैं कि कानून क्या सिर्फ आम आदमी के लिए है या भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने के लिए भी?
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