उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिला अंतर्गत पुतसर की पावन धरती पर स्थापित ADV इन्वेंशन एकेडमी में अभय कुमार प्रजापति के नेतृत्व में छोटे-छोटे बच्चों ने शिक्षा माफियाओं और भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों की मिलीभगत के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है। गरीब और कमजोर वर्गों की शिक्षा व्यवस्था को सामंतवादी और तानाशाही आगोश में दफन कर इसे भेदभाव का सबसे बड़ा प्रतीक बना दिया गया है। अभय कुमार प्रजापति के परिवार ने अपनी जान की बाजी लगाकर सत्ता का संरक्षण प्राप्त अत्याचारी, धनबली और प्रभावशाली लोगों का डटकर सामना किया है, जबकि लचर कानून व्यवस्था के कारण शासन, प्रशासन, सरकार और मीडिया मूकदर्शक बने हुए हैं। शिक्षा के अधिकार का ऐसा हनन पहले किसी सरकार में नहीं देखा गया, जिससे लगता है कि सामंतवादी तानाशाह पुरानी गुलामी प्रथा को योजनाबद्ध तरीके से जीवित करना चाहते हैं।
इस संघर्ष के बीच अनिल प्रजापति में कमियां निकालने वालों पर भी तीखे सवाल उठाए गए हैं और उन्हें अभाव में जनहित के कठिन संघर्ष को महसूस करने की चुनौती दी गई है। क्रांतिकारियों को तोड़ने के लिए “फूट डालो और राज करो” की नीति के तहत साम-दाम-दंड-भेद अपनाकर चौतरफा हमले किए जा रहे हैं। आज के युग में योग्यता के बजाय सफलता बिकने और धन-दौलत व भौकाल के आगे गरीब की प्रतिभा का दमन करने का कुचक्र रचा जा रहा है, मानो पैसा ही सबकुछ हो गया हो।
यदि जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके की भूख हड़ताल शिक्षा जगत की जनक्रांति बनती है, तो उसकी बुनियादी नींव अभय कुमार प्रजापति जैसे छात्रों का जमीनी संघर्ष ही है, जो सपरिवार जान की बाजी लगाकर भेदभाव मुक्त, सस्ती व समान शिक्षा का प्रतीक बन रहे हैं। अब फैसला जनता के हाथ में छोड़ दिया गया है कि वे भौकालबाज अत्याचारियों का साथ देंगे या सामूहिक विकास के इस नेक संघर्ष को महत्व देंगे। यह लड़ाई केवल एक स्कूल की नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की है, और जिस दिन गरीब का बच्चा पढ़-लिख जाएगा, उस दिन सामंतवाद का अंत निश्चित है।
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