*रीवा में सवर्ण संगठनों का अनोखा विरोध, मौन नेताओं का किया प्रतीकात्मक दाह संस्कार और पिंडदान*
*♦️रीवा : समाचार अपडेट*
रीवा शहर के विवेकानंद पार्क में आज विरोध का ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा छेड़ दी है। विभिन्न सवर्ण संगठनों से जुड़े पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में पार्क में एकत्रित हुए और UGC के नए नियमों, SC-ST एक्ट के दुरुपयोग तथा आरक्षण जैसे ज्वलंत मुद्दों पर चुप्पी साधे रहने वाले जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों के नेताओं के खिलाफ अनोखे अंदाज में अपना आक्रोश व्यक्त किया।प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब लगातार सवर्ण समाज अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन दे रहा है, सड़कों पर उतर रहा है, तब भी क्षेत्र के सांसद, विधायक और बड़े नेता संसद और विधानसभा में इस मुद्दे पर आवाज उठाने से बच रहे हैं। इसी मौन के विरोध में उन्होंने व्यंग्यात्मक तरीके से नेताओं को राजनीतिक रूप से मृत मानते हुए उनका प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। कार्यकर्ताओं ने साफ संदेश दिया कि जब नेता जनता की आवाज नहीं सुनेंगे तो जनता भी उन्हें राजनीतिक रूप से स्वर्गवासी मानने में देर नहीं करेगी।
*विवेकानंद पार्क से बिछिया नदी तक निकली शवयात्रा, मुंडन कर किया पिंडदान*
विरोध प्रदर्शन की शुरुआत विवेकानंद पार्क में सभा के साथ हुई जिसके बाद वहां से बिछिया नदी होते हुए बड़ी पुल तक प्रतीकात्मक शवयात्रा निकाली गई। शवयात्रा के दौरान कार्यकर्ताओं ने मुंडन संस्कार किया, नदी किनारे पिंडदान किया और फिर प्रतीकात्मक दाह संस्कार कर अपना विरोध दर्ज कराया। पूरे कार्यक्रम के दौरान किसी भी प्रकार की कानून व्यवस्था भंग नहीं हुई और प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा।आयोजकों ने कहा कि यह विरोध किसी व्यक्ति विशेष या जाति के खिलाफ नहीं बल्कि व्यवस्था की खामोशी के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आने वाले समय में भी जनप्रतिनिधियों ने इन मुद्दों पर अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी तो यह पिंडदान और सद्बुद्धि यज्ञ जैसे कार्यक्रम लगातार जारी रहेंगे।
*✍️ उमेश पाठक
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