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उत्तर प्रदेश में मऊ के रहने वाले एक युवक विक्रम की जेल में संदिग्ध मौत होने के बाद भारी बवाल खड़ा हो गया है। विक्रम को पिछले रविवार को आजमगढ़ पुलिस ने चोरी के आरोप में हिरासत में लिया था, जिसके बाद बीती रात उसकी जेल में मौत हो गई। इस घटना से आक्रोशित परिजनों ने पुलिस पर बेहद गंभीर और सीधा आरोप लगाया है कि पुलिसकर्मियों ने विक्रम को पीट-पीटकर मार डाला है। इस दर्दनाक घटना के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें न्याय की भीख मांगती मृतक की बेबस भाभी एक पुलिसकर्मी के पीछे भागती नजर आ रही है।
इस ‘कस्टोडियल डेथ’ ने राज्य सरकार के दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यही उत्तर प्रदेश का वह ‘अपराध-मुक्त’ और ‘सुरक्षित’ राज्य है, जहाँ अब थाने और जेल ही लोगों की जान लेने के अड्डे बन चुके हैं? इस संदिग्ध मौत का जिम्मेदार आखिर कौन है? योगी आदित्यनाथ जी के इस प्रदेश में उनकी प्राथमिकताओं को लेकर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया गया है कि योगी जी ने उत्तर प्रदेश को एक ‘पुलिस स्टेट’ में तब्दील कर दिया है, जहाँ हत्यारों, बलात्कारियों और भ्रष्टाचारियों के दम पर राज चलाया जा रहा है।
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