शुरू न्यूज़
शिव पुराण की कोटिरुद्र संहिता के अनुसार, भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र जन्म से प्राप्त नहीं था, बल्कि यह उन्हें भगवान शिव की कृपा से मिला था। पौराणिक प्रसंग के अनुसार, जब दैत्यों के अत्याचार से देवता और समस्त लोक पीड़ित हो उठे, तब भगवान विष्णु ने महादेव की शरण ली। उन्होंने भगवान शिव के सहस्र नामों का उच्चारण करते हुए प्रत्येक नाम पर एक-एक कमल अर्पित करने का संकल्प लिया।
भगवान शिव ने उनकी भक्ति की परीक्षा लेने के लिए एक कमल अदृश्य कर दिया, जिससे गिनती में केवल 999 कमल ही रहे। पूजा अधूरी न छोड़ने के लिए ‘कमलनयन’ भगवान विष्णु ने बिना किसी संकोच के अपना कमल समान नेत्र अर्पित करने का निश्चय कर लिया। उनके इस अभूतपूर्व संकल्प से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए, उनका नेत्र पुनः प्रदान किया और उन्हें अधर्म के विनाश तथा सृष्टि के संतुलन के लिए दिव्य सुदर्शन चक्र का वरदान दिया। इस प्रसंग के जरिए संदेश दिया गया है कि ईश्वर के समक्ष सबसे महान अर्पण धन या वैभव नहीं, बल्कि निष्काम भक्ति और पूर्ण समर्पण है।
अपना राज्य चुनें
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
बिहार
छत्तीसगढ़
दिल्ली
हरियाणा
हिमाचल प्रदेश
जम्मू और कश्मीर
झारखंड
मध्य प्रदेश
राजस्थान
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड