एक अच्छा शिक्षक आशा जगाता है, कल्पना को प्रज्वलित करता है और सीखने के प्रति प्रेम पैदा करता है, इं० बृजमोहन (युवा नेता/दलित चिंतक/समाजसेवी)________________
राघवेन्द्र त्रिपाठी संवाददाता विधान केसरी संत कबीर नगर
माता-पिता हमें जन्म देते हैं, लेकिन शिक्षक हमारे जीवन को सही दिशा, आकार और अर्थ देते हैं। शिक्षक केवल किताबों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि वे हमें यह सिखाते हैं कि एक अच्छा इंसान कैसे बनना है। वे हमें अनुशासन, सत्यनिष्ठा और कठिन परिस्थितियों में भी हार न मानने का हौसला देते हैं। हमारे गुरु हमारे मार्गदर्शक हैं जो हमें अँधेरे से उजाले की ओर ले जाते हैं। इस विशेष दिन पर हम अपने सभी गुरुओं के अथक प्रयासों और समर्पण के लिए उनके प्रति दिल से आभार व्यक्त करते हैं।
भारत के दूसरे राष्ट्रपति और पहले उपराष्ट्रपति डॉ0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती 05 सितंबर को देश भर में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। दरअसल टीचर्स डे का दिन वह अवसर होता है, जब हम अपने शिक्षकों को उनके मार्गदर्शन और ज्ञान देने के लिए तहे दिल से धन्यवाद देते हैं। शिक्षकों की कक्षा में ही कल का भारत पलता है। टीचर्स सिर्फ क्लास में किताबें नहीं पढ़ाते, वे जीवन का सबसे गहरा ज्ञान भी देते हैं। शिक्षक दिवस के दिन स्कूलों में बच्चे शिक्षक बनकर जाते हैं, उन्हें अपनी क्लास से छोटी कक्षाओं में पढ़ाने का मौका दिया जाता है। स्कूलों में निबंध, चित्रकला, भाषण, वाद विवाद प्रतियोगिताएं होती हैं। स्कूल और कॉलेजों ही नहीं, बल्कि राज्य व केंद्र की सरकारें भी अच्छा प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को सम्मानित करने के लिए पुरस्कार समारोह आयोजित करते हैं। शिक्षक हमें सिर्फ पढ़ाते नहीं हैं, वे हमारे भविष्य को आकार भी देते हैं। हमें जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं। वे हमारी गलतियां बताते हैं, ताकि हम लगातार सुधार कर सकें। गुरु हमें जीवन के हर नए मोड़ पर आने वाली सभी कठिनाइयों से लड़ने की शक्ति देते हैं। वे एक कुम्हार की तरह हमारे व्यक्तित्व को गढ़ते हैं।डॉ0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन कहते थे कि छात्रों को कल्पनाशील होने के साथ-साथ स्वस्थ और आत्मविश्वासी भी होना चाहिए। वे कहते थे कि किताबें पढ़ने से हमें एकांत में विचार करने की आदत और सच्ची खुशी मिलती है। पुस्तकें वो साधन हैं, जिनके माध्यम से हम विभिन्न संस्कृतियों के बीच पुल का निर्माण कर सकते हैं। पिछले कुछ सालों में इंटरनेट और तकनीक के माध्यम से ज्ञान आसानी से उपलब्ध है, लेकिन जो संस्कार, नैतिक मूल्य और जीवन का दृष्टिकोण एक शिक्षक दे सकता है, वह कोई तकनीक नहीं दे सकती। कक्षा में मिली असफलता के बाद शिक्षक का थपथपाया हुआ हाथ और यह कहना कि “तुम कर सकते हो”, किसी भी बच्चे का भविष्य बदल सकता है। शिक्षक केवल परीक्षा पास करने के लिए नहीं पढ़ाते, वे हमें समाज का एक जिम्मेदार, संवेदनशील और सक्षम नागरिक बनाते हैं। देश के डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, कलाकार या नेता- हर सफल व्यक्ति के पीछे किसी न किसी शिक्षक की मेहनत और मार्गदर्शन छिपा होता है। ऐसे में हमारा भी कर्तव्य है कि हम अपने गुरुओं का सम्मान केवल एक दिन कार्ड या फूल देकर न करें, बल्कि उनके दिखाए मार्ग पर चलकर करें। सच्चा सम्मान यही होगा कि हम अनुशासित रहें, लगन से पढ़ाई करें, समाज में अच्छे कार्य करें और अपने शिक्षकों का नाम रोशन करें। ‘गुरु बिन ज्ञान न उपजै, गुरु बिन मिलै न मोक्ष। गुरु बिन लखै न सत्य को, गुरु बिन मिटै न दोष।।’
अपना राज्य चुनें
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
बिहार
छत्तीसगढ़
दिल्ली
हरियाणा
हिमाचल प्रदेश
जम्मू और कश्मीर
झारखंड
मध्य प्रदेश
राजस्थान
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड