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दतिया जिले के भाण्डेर में वर्ष 2024 के बहुचर्चित भगवान सिंह यादव हत्याकांड में जिला न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। तृतीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेश भंडारी की अदालत ने बुधवार को मामले के तीन आरोपियों आशीष रजक, अशोक रजक उर्फ बुजवंशी रजक और अरविंद उर्फ अरी रजक, जो काजीपाठा मोहल्ला भाण्डेर के निवासी हैं, को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक आरोपी पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 10 मई 2024 की सुबह घटी थी, जब भगवान सिंह यादव आटा लेने के लिए चिरगांव चुंगी स्थित आशीष रजक की चक्की पर पहुंचे थे। इसी दौरान, किसी बात को लेकर भगवान सिंह यादव का आरोपियों से विवाद हो गया। आरोप है कि अशोक और अरविंद ने लकड़ी के डंडों से भगवान सिंह यादव के साथ मारपीट की, जबकि आशीष ने चक्की पर रखे करीब 20 किलो वजनी लोहे के बांट से उनके सिर पर हमला कर दिया।
इस हमले में भगवान सिंह यादव गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद, मृतक के भाई दिनेश कुमार यादव की शिकायत पर भाण्डेर थाना पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया।
मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषी पाया। अभियोजन पक्ष की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक मुकेश गुप्ता ने इस मामले में पैरवी की। न्यायालय ने अपने निर्णय में यह भी स्पष्ट किया कि दिनदहाड़े की गई यह हत्या गंभीर प्रकृति का अपराध है, जिसने क्षेत्र में भय का वातावरण निर्मित किया था, और ऐसे में आरोपियों को कठोर दंड दिया जाना न्यायोचित है।
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