शुरू न्यूज़
देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर बीते कई दिनों से चल रहा छात्र आंदोलन सफलता की मिसाल बन चुका है। बिना तोड़फोड़, बिना हिंसा और बिना किसी राजनीतिक झंडे के छात्रों ने यह साबित कर दिया कि अनुशासन और शांति ही अपनी माँगें मनवाने का सबसे बड़ा हथियार है। शिक्षा में पारदर्शिता, भर्ती में देरी खत्म करने, पेपर लीक पर कठोर कानून बनाने और युवाओं को रोजगार के ठोस अवसर देने जैसी माँगों को लेकर देशभर से आए छात्र-छात्राएं जंतर-मंतर पर डटे रहे। छात्रों ने हर दिन समय पर प्रदर्शन किया, सफाई रखी, ट्रैफिक बाधित नहीं होने दिया और संवाद का रास्ता खुला रखा, जिसके कारण सरकार को वार्ता के लिए मजबूर होना पड़ा और माँगों पर ठोस आश्वासन मिले।
हालांकि, पिछले दो-तीन दिनों में कुछ अराजक तत्वों ने आंदोलन में शामिल होकर उपद्रव मचाया, जिस पर छात्रों ने भारी दुख जताया। छात्रों ने तुरंत उन तत्वों की पहचान कर उन्हें आंदोलन से दूर किया और मंच से ऐलान किया कि हिंसा इस आंदोलन का हिस्सा नहीं है। आंदोलन के सुर्खियों में आते ही समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों के नेता बैनर, माइक और कैमरे के साथ फोटो खिंचवाने पहुँच गए। लेकिन छात्रों ने मंच से ‘हमें नेतागिरी नहीं, नीति चाहिए’ के नारे लगाकर और ‘यह आंदोलन छात्र का है, पार्टी का नहीं’ कहकर मौकापरस्त नेताओं को सीधे मंच से करारा जवाब दे दिया।
छात्र नेताओं ने साफ किया है कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि सिर्फ एक चरण सफल हुआ है। अब सरकार के लिखित आश्वासन पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। अगर सरकार अपने वादे पूरे नहीं करती है तो उसी शांति और अनुशासन के साथ जंतर-मंतर पर फिर से प्रदर्शन किया जाएगा। छात्रों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि देश आगजनी से नहीं, बल्कि आवाज से बदलेगा।
अपना राज्य चुनें
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
बिहार
छत्तीसगढ़
दिल्ली
हरियाणा
हिमाचल प्रदेश
जम्मू और कश्मीर
झारखंड
मध्य प्रदेश
राजस्थान
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड