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उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित पवित्र धार्मिक स्थल चित्रकूट में इन दिनों ‘भरत दास बाबा’ से जुड़ा एक विवाद लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। इस पूरे मामले की मुख्य जड़ चित्रकूट के एक प्रतिष्ठित आश्रम की कीमती जमीन और उसके मालिकाना हक को लेकर है। भरत दास बाबा और उनके समर्थकों पर आरोप है कि उन्होंने आश्रम की संपत्ति और प्रबंधन पर जबरन नियंत्रण करने का प्रयास किया है। वहीं, आश्रम से जुड़े दूसरे पक्ष और स्थानीय संतों के एक गुट का दावा है कि भरत दास बाबा का आश्रम की परंपरा और नियमों से कोई वैध संबंध नहीं है और वे अवैध रूप से इस पर काबिज होना चाहते हैं।
इस विवाद को लेकर चित्रकूट के कई स्थानीय अखाड़ों और संतों ने कड़ा विरोध जताया है। उनका मानना है कि इस तरह की गतिविधियों से चित्रकूट की पवित्रता और छवि धूमिल हो रही है। आश्रम परिसर में तनाव बढ़ने और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस और प्रशासन को बीच-बचाव करना पड़ा है। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आश्रम के आसपास भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया था।
अब यह विवाद पुलिस और कोर्ट की चौखट तक पहुंच चुका है, जहां दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। विपक्षी गुट ने भरत दास बाबा पर दस्तावेजों में हेरफेर और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस उपायुक्त स्तर पर निष्पक्ष जांच के आदेश दिए गए हैं, ताकि जमीन के असली हकदार का पता लगाया जा सके और किसी भी संभावित हिंसा को रोका जा सके।
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