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बृजभूषण शरण सिंह ने राम जन्मभूमि आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया था और इस दौरान हुए संघर्षों के कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। उनके समर्थकों और स्वयं उनके बयानों के अनुसार, जेल में भी उनका अच्छा खासा दबदबा था, जहाँ वे अन्य आंदोलनकारियों के साथ सक्रिय रहे।
उन्होंने कई मौकों पर कहा है कि राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है और इसका श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि उन हजारों कार्यकर्ताओं, संतों और नेताओं को जाता है जिन्होंने इस आंदोलन को खड़ा किया। हालाँकि, हाल के वर्षों में बृजभूषण शरण सिंह ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है कि मंदिर निर्माण के बाद उन पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की गई है जिन्होंने आंदोलन को मजबूत बनाने में अपनी भूमिका निभाई थी। उनका मानना है कि स्थानीय स्तर के कार्यकर्ताओं को व्यवस्था से धीरे-धीरे अलग कर दिया गया।
हाल के दिनों में वे मंदिर में दान राशि और व्यवस्था को लेकर काफी मुखर रहे हैं। उन्होंने दावा किया है कि वे पिछले चार वर्षों से राम मंदिर के दर्शन के लिए नहीं गए हैं, क्योंकि उन्हें शुरू से ही मंदिर प्रबंधन और व्यवस्था में कुछ अनियमितताओं की आशंका थी। उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी की है।
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