कप्तानगंज थाने में दलित महिला, कैंसर पीड़ित पति व मासूम बच्चे को कई घंटे बैठाने का आरोप, पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल*
*कप्तानगंज थाने में दलित महिला, कैंसर पीड़ित पति व मासूम बच्चे को कई घंटे बैठाने का आरोप, पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल*
– थानाध्यक्ष आलोक कुमार श्रीवास्तव कप्तानगंज पर 01 वर्ष से है जमें
– बस्ती जिले के पहले ऐसे थानाध्यक्ष आलोक कुमार श्रीवास्तव है जो 01 बजे से कप्तागंज थाने पर है जमें
– थानाध्यक्ष आलोक कुमार श्रीवास्तव की लम्बी तैनाती के कारण गरीब, असहाय पीड़ितों को नही मिल पा रहा है न्याय
*कप्तानगंज बस्ती*। कप्तानगंज थाना पुलिस की कार्यशैली को लेकर एक दलित महिला ने गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का आरोप है कि उसके प्रकरण में मुकदमा दर्ज करने के बजाय उसे, उसके कैंसर पीड़ित पति और करीब दो वर्षीय मासूम बच्चे को थाने में कई घंटे बैठाया गया।
पीड़िता के मुताबिक, उसका कैंसर पीड़ित पति दवा खाने के लिए पुलिसकर्मियों से कई बार आग्रह करता रहा, लेकिन उसे दवा लेने जाने की अनुमति नहीं दी गई और कथित रूप से डांट-फटकार कर कई घंटे थाने में बैठाए रखा गया। वहीं, करीब दो वर्षीय मासूम बच्चे को भी थाने में बैठाए जाने को लेकर थानाध्यक्ष की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि मामले में हल्का सिपाही पंकज सिंह के माध्यम से उस पर सुलह-समझौते का दबाव बनाया गया। दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने का प्रयास सफल नहीं होने पर पीड़िता के कैंसर पीड़ित पति को कथित रूप से डराया-धमकाया गया।
पीड़िता के पति का आरोप है कि हल्का सिपाही पंकज सिंह ने उन्हें यह कहते हुए धमकाया कि “कप्तानगंज पुलिस को नहीं जानते हो, पैरवी करने वालों पर भी मुकदमा दर्ज करती है।” हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
पीड़िता का आरोप है कि सुलह-समझौता नहीं होने के बाद पुलिस ने उसका शांति भंग की आशंका में चालान कर दिया। इस पूरे मामले को लेकर पीड़िता ने कप्तानगंज थानाध्यक्ष आलोक कुमार श्रीवास्तव और हल्का सिपाही पंकज सिंह की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
पीड़िता का यह भी आरोप है कि थानाध्यक्ष आलोक कुमार श्रीवास्तव लंबे समय से कप्तानगंज थाने पर तैनात हैं और उनकी करीब एक वर्ष की तैनाती के दौरान कई पीड़ितों को न्याय के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पीड़िता ने बताया कि वह मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक बस्ती सहित जिले के उच्चाधिकारियों से करने की तैयारी में है। पीड़िता ने अधिकारियों से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई तथा उसे न्याय दिलाने की मांग की है।
अब देखना यह है कि पुलिस के उच्चाधिकारियों द्वारा इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं ? और क्या पीड़िता को न्याय मिल पाता है या नहीं ?
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