पांढुर्णा का ऐतिहासिक गोटमार मेला संपन्न, घायलों की कुल संख्या 1326 तक पहुंची
पांढुर्णा में ऐतिहासिक गोटमार मेला परंपरा के अनुसार उत्साह और संघर्ष के साथ संपन्न हुआ. आज परंपरा के अनुसार पांढुर्णा के खिलाड़ियों ने झंडा तोड़. आज मुकाबला बेहद कड़ा और मुश्किल था, जिससे शुरुआती दौर में ऐसा लग रहा था कि पांढुर्णा वाले झंडा तोड़ नहीं पाएंगे, लेकिन खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट खेल का प्रदर्शन करते हुए अंततः सफलता हासिल की. सावरगांव और पांढुर्णा दोनों पक्षों के बीच झंडे पर कब्जे को लेकर जाम नदी में गोटमार का यह अभूतपूर्व और रोमांचक खेल खेला गया, जिसमें दोनों तरफ से एक-दूसरे पर जमकर पत्थर बरसाए गए. ड्रोन के जरिए बनाए गए वीडियो में जाम नदी के दोनों किनारों पर भारी जनसमूह नजर आया और खिलाड़ी एक-दूसरे पर लगातार पत्थर चलाते दिखाई दिए.
इस पारंपरिक और खूनी संघर्ष के खेल के दौरान बड़ी संख्या में लोग घायल होते हैं, जिसमें किसी की आंख तो किसी का पैर घायल होता है और कई अन्य लोगों को गंभीर चोटें आती हैं. प्राप्त जानकारी के अनुसार, पांढुर्णा से कांग्रेस विधायक निलेश उईके ने भी इस पत्थरबाजी के खेल में हिस्सा लिया.
मेले के दौरान रिपोर्टिंग समयावधि सुबह नौ बजे से शाम सात बजे तक कुल घायल व्यक्तियों की संख्या बढ़कर 1326 तक पहुंच चुकी है, जिनमें से 49 गंभीर घायलों को बेहतर इलाज के लिए अन्यत्र रेफर किया गया है. मेला प्रबंधन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार राजेंद्र शाला सावरगाँव प्रथम में 208, राजेंद्र शाला सावरगाँव द्वितीय में 203, शेख जावेद झंडा चौक में 118, मारोती मण्डल गुजरी चौक प्रथम में 194, मारोती मण्डल गुजरी चौक द्वितीय में 261, मारोती मण्डल गुजरी चौक तृतीय में 253 तथा सामुदायिक भवन गुजरी चौक में 89 घायल पहुंचे.
घायलों में सावरगांव निवासी 33 वर्षीय का पैर टूट गया, 48 वर्षीय के कंधे की हड्डी टूट गई, पांढुर्णा निवासी 39 वर्षीय का पैर टूट गया तथा सावरगांव निवासी 30 वर्षीय का सिर और पैर में गंभीर चोटें आईं. संजय और सचिन समेत कुल 5 लोगों को नागपुर रेफर किया गया है.
इस खेल में उन सभी खिलाड़ियों का बहुत बड़ा योगदान और साहस रहा है जो गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद डटे रहे. घायलों को तुरंत चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए मेला क्षेत्र में 7 अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए थे. स्वास्थ्य विभाग द्वारा कुल 44 डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई थी और 22 एंबुलेंस लगातार तैनात रखी गईं, जिनके माध्यम से घायलों को जरूरत के मुताबिक प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत अस्पताल भेजा गया.
सदियों पुरानी इस परंपरा और भारी भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिसके तहत 700 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे. साथ ही, मेला क्षेत्र और उसके आसपास के इलाकों की निगरानी के लिए 10 सीसीटीवी कैमरे और 3 ड्रोन का उपयोग किया गया. गौरतलब है कि गोटमार मेले में वर्ष 1955 से लेकर 2025 तक पत्थरबाजी की घटनाओं के दौरान कुल 13 लोगों की जान जा चुकी है.
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