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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के यातायात विभाग से जुड़ा एक कथित रिश्वतखोरी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य सरकार भ्रष्टाचार मुक्त शासन व्यवस्था के लिए लगातार अभियान चला रही है। इस घटना ने सीधे तौर पर पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला लखनऊ के मड़ियाव चंद्राढाल क्षेत्र का है, जहां यातायात सुचारु रखने और नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यावसायिक वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई करने के लिए यातायात विभाग के टीएसआई निर्भय सिंह की ड्यूटी लगाई गई थी। इसी बीच सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में आरोप लगाया गया है कि बसों का चालान न करने के एवज में टीएसआई द्वारा बस चालक एवं वाहन प्रबंधन से ₹5,000 की मांग की गई। वीडियो बनाने वाले व्यक्ति का दावा है कि उसने स्वयं पुलिस बूथ पर जाकर यह राशि टीएसआई को दी और इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। इस कथित वीडियो में बसों की संख्या, उनके संचालन और पैसों के लेन-देन को लेकर बातचीत भी सुनाई दे रही है।
फिलहाल इस वायरल वीडियो की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही पुलिस विभाग की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। यदि वीडियो में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह पुलिस की छवि और सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा। अब सभी की निगाहें डीसीपी यातायात रवीना त्यागी पर टिकी हैं कि वह इस मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराती हैं या नहीं, और सत्यता पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध क्या विभागीय और विधिक कार्रवाई की जाती है।
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